Sunday, June 22, 2008

बाकि है अभी

आशा की किरने बाकि है अभी
उषा की बूंदे बाकि है अभी
निर्मोही संसार में,
कुछ दिन बाकि है अभी
नास्वर शरीर में चंद सांसे बाकि है अभी
लक्ष्य को पाने की चाहत, में चलना है अभी
जो दूर तो है पर ज्यादा दूर नही
देर से ही सही, पर उसे पाना है अभी
दूर तक चलना पड़े तो चलना है अभी
आशा की .............
सितारों की बिच में चाँद को चमकना है अभी
सितम है चांदनी पे अंधेरों का अभी
सितम की ये काली रात ...........है अभी
चमकता चाँद निकलना है अभी
सचीन

1 comment:

Anonymous said...

I have seen your work. Neil