हुस्न वालों की रात है आज
दिलवालों की बात है आज
हम तोह है पत्थर दिल, हमारी क्या औकात है आज
कहाँ फसा रहे हो हमे हुस्न वालों के झमेलों में
हम तो फेस है, गुर्वातों के मेलों में
सचीन
Monday, February 16, 2009
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