कुछ नही है इसके सिवा, देने को कुछ गम के सिवा
जिंदगी भी खाली है, नही है कुछ गम के सिवा
गर रास आए तुमको साथ मेरा
चाहना न कभी किसी को मेरे सिवा
चाहत में तेरी डूबा हर लफ्ज है
यादो में तेरी खोया हर नगम है
कागज पर भी कुछ नही तेरे सिवा
जीवन के हर पल में तुम
मेरे आज कल में तुम
बाकि नही है अब कोई मेरा निशा
कुछ नही .......
अपनी जिंदगी में पहली बार आप के इस लेखक को प्यार हुआ है इससे इश्क हुआ है ये नगम मेरी अपनी उसी प्यार के नाम
आपका सचीन निरंजन केजरीवाल