इंतज़ार में नुक्स है
इंतज़ार में नुक्स है,
इल्म इसका किसको है,
लुफ्त ए इंतज़ार का मज़ा बन गई
अजीब सी सजा धड़कने चाहत की
इंतज़ार ए धड़कन हो गई
और एक तुम हो की ..........हा.
बदल गए हो तुम जब से, जुदा हुए हो तुम,
न जाने क्यू ये नाराज़गी है, किस बात का गुमां है
खबर नहीं तुम्हे के कोई प्यार में तेरे कितना दर दर घुमा है,
खामोश हो तुम पर इधर अजीब सी हलचल है
क्यू कोई इबादत करे
कोई क्यू तुमको पूजे
नीम सजदे में क्यू कोई झुके
कैसे चले कोई इन राहो पे,
जिस पे हर पग पत्थर दिल सनम मिले
उफ़ कितनी विसम्ताओ से भरा है ये जीवन
उस पर दुविदा जीने की
क्या जुल्म है ये
क्या सितम है ये