Saturday, September 5, 2009
मेरी राधा वापस करो कन्हैया
सुन लो मेरी ओ बंशी बजैया
कुछ ऐसा ......
मेरी राधा हुई तेरी दीवानी,तेरा बन्ने की उश्ने है ठानी
बैठे-बिठाये क्या किया,तुझको कमी क्या गोपियाँ की
ओ नटखटिया
कुछ ऐसा .....
क्या जादू क्या मंतर मारा
अपनी मुरलिया का किया क्या इशारा
मेरी राधा तुने छीनी वापस दे-दे, ओ रास-रचैया
कुछ ऐसा ....
मथुरा की गलियां,गोकुल की गोपी
तेरे बिन सब है सुनी पड़ी
आजा-सजा-जा ओ कृष्ण कन्हैया
कुछ ऐसा........
सचीन निरंजन केजरीवाल
Sunday, August 23, 2009
तुमसे सीखे / भूल जाते हो
दिल को चुराना कोई तुमसे सीखे
नजरे मिलाना और न न कहना
हँसते-मुस्कराते दिल को चुराना
कसमों को देना,वादों को लेना
दिल चाहे जब फिर तोर देना
ऐसी आदयें कोई तुमसे सीखे
आ के न आना कोई तुमसे सीखे
तुमको पता है हम मरते है तुमपे
दिलों जान से प्यार करते है तुमसे
अकरते हो तुम,चलते हो तन के
ऐसी अदाए कोई तुमसे सीखे
आ के न --------
बनते हो सीधे,दीखते हो भोले
जालिम बड़े हो तुम कातिल ओ मेरे
नजरे मिलाना और न न कहना
दिल को चुराना कोई तुमसे सीखे
आ के न ------
नम.२
अरे जाते हो तुम जो चले जाते हो
आने के रस्ते सरे भूल जाते हो
हाँ जाते हो तुम जो---------
रूठ जाते हो जब तुम मानते नही
लगता है ऐसे हमको जानते नही
ये ठीक नही है जान लो,
कहना मेरा देखो तुम मान लो
मुझको जरा पहचान लो
क्यों जलाते हो दिल को दिलबर मेरे
मान जाते नही क्यों सितमगर मेरे
अरे जाते हो ------
सचीन निरंजन केजरीवाल
भगवन
मैंने तुमको देखा है,मेरे भोले भगवन
मिलने मुझसे आते हो ख्वाबों में तुम हरदम
तुम अच्छे हो,तुम सच्चे हो
तुमसे है ये जीवन
मुझको बनाया है तुमने,और बनाया जमी ये गगन
मैंने तुमको-----
दिल में हो तुम बसे हुए,मन में हो तुम सजे हुए
हर जगह हो तुमको ही, तुम हो बस हर जगह
मेरे भोले भगवन
मैंने तुमको -----
कभी-कभी तुम रूठ जाते हो मुझसे
अभी भी तो तुम रूठे हो मुझसे, मान भी जाओ,अब जिद छोड़ो -२
मेरे प्यारे भगवन
मैंने तुमको---
दुःख में और चिंता में साथ रहो तुम हरदम
इतनी कृपा करो हमपे रहे हर तरफ़ खुशियो का मौसम
मैंने तुमको देखा है .........
सचीन निरंजन केजरीवाल---
मुझे कुछ न चाहिए------
एक तेरा प्यार हो संग मेरे सदा
तनहा रहू मैं न कभी
प्यार से ये तेरा वादा
मुझे कुछ न ----
चाहे हो शहर,चाहे समंदर
चाहे वो महल हो,चाहे खंडर
धरती पे रहू,चाहे रहू अम्बर पर
मुझपे रहे सदा तेरा असर
मुझे कुछ न---
मैं हूँ सदा तेरा ही जाना
जाने से पहले तुम चली आना
भूल जाऊँ मैं तुझको,उससे पहले तुम याद आना
जीवन भर साथ रहना,सुन लो जाना तुम मेरा कहना
मुझे कुछ न ----
सचीन निरंजन केजरीवाल
Thursday, August 20, 2009
क्यों पूजे हम तुमको ?
दिया है क्या तुमने हमको बना दिया शैतान
क्यों पूजे ----
आज नही, कल का नही कभी का नही है रिश्ता अपना
हो कहाँ तुम मुझको दिख जाओ भगवान
क्यों पूजे----
नही हो तुम मेरे अपने, पुरे किए नही कोई सपने
फ़िर हो कैसे तुम भगवान
क्यों पूजे -----
दुःख दिया है, दर्द दिया है
कर दिया जीवन को शमशान
तख्लिफों में जीते है हम, तुम कैसे हो भगवान
क्यों पूजे---
पत्थर हो तुम,माटी हो नही है तुम में जान
क्यों पूजे----
इस दिल को तुने जला दिया
सब कुछ तुने खाक किया
अब रहा नही मैं इन्सान
क्यों पूजे ----
सचीन निरंजन केजरीवाल
हवा
गजल
तंगहाल जिंदगी
बिद्या की देवी
दीवाना
मैं क्या करू मैं प्यार में हूँ-४
आग नही अब मुझको जलाती है,
याद तेरी जब मुझको सताती है
बारिश नही अब मुझको भिंगोती है
आंसू मेरे अब मुझको भिन्गोते है
मैं क्या करू
मैं-४
तन्हाई मुझको अब डसती नही है
रुसवाई मुझको अब खलती नही है
आदत है जबसे जीने में ऐसे,
कुछ भी नही है सिने में तब से
अब क्या करू, मैं क्या कहू
मैं प्यार में हूँ -४
मैं प्यार में हूँ, हाँ मैं प्यार में हूँ
तेरे प्यार में हूँ, मैं प्यार में हूँ
सचीन निरंजन केजरीवाल
Wednesday, July 8, 2009
अक्षत
अक्षत हूँ मैं क्षत कभी होता नहींमैं धरा हूँ,मैं गगन हूँभूतल में भी मैं ही हूँब्रह्म मैं हूँ, बिष्णु मैं हूँहर जन का स्वामी हूँ मैंटिके नही सामने दुश्मन कोईकरे जो क्षत मुझे ऐसा नही कोईकृष्ण मुझमे, राम मैं हूँहां हां मैं अक्षत हूँरवि है मुझमे, शनि हैमुझमे हर एक का स्वरुप हूँविपदा में मैं साथी हूँ,संघर्ष में विकराल हूँमान्यवर हूँ न नश्वर हूँक्यों की मैं अक्षत हूँमैं अग्नि हूँ,मैं हवा हूँमैं ही तो समंदर हूँचल हूँ मैं,अचल हूँ मैंकण-कण और पल-पल हूँ मैंद्वार मैं हूँ,भीत मैं हूँहर जन का मीत हूँ मैंसुख है मुझमे, दुःख है मुझमेभवसागर तो मैं ही हूँहां हां मैं अक्षत हूँपार्थ मैं हूँ, बंधू मैं हूँहर लेख और निबंध मैं हूँज्ञान हूँ अज्ञान हूँ,ज्योति मुझमे,ज्वाला मुझमेशीत की लहर हूँ मैंसाम, दाम, दंड, भेद, हूँ मैंहां हां मैं अक्षत हूँमोक्ष मैं हूँ,काम मैं हूँमृत्यु और आकाल मैं हूँशुभ हूँ मैं अशुभ हूँ मैंहर युग का आगाज मैं हूंसिखा है मुझमे, दिशा है मुझमेसुख दुःख का भंडार हूँहां हां मैं अक्षत हूँ
ख्वाइश
ख्वाइश नही दिल में कोई, बस तुझसे ही मिलता रहू
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
ढूंदु कहा पूछु मैं किस्से
तेरा पता कोई जाने नही
जाऊँ कहा सोचु मैं फिर से
रास्ता कोई मिलता नही
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
सुनता रहू ..................
तेरा निशा, दीखता नही
मेरा जहाँ, सजता नही
मेरा खुदा कुछ चुप सा है
मेरी जमी चलती नही
कहा है तू ................
सपनो में ही..............
सुनता रहू ...................
सचीन निरंजन केजरीवाल
Monday, July 6, 2009
दुनिया से
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैंने दिल दिया है, तुमको न इसको ठुकराना
वरना बन्जाऊंगा मैं एक अफसाना
हो जाऊंगा मैं तो दीवाना
मैंने प्यार......
ऐसा नही ये खेल है, ये तो दिलो का मेल है
इन दो दिलो को तुम मिल जाने को देना
मैंने प्यार....
कभी किसी से कहा नही जो कह रहा हूँ तुमसे
अपना मन है तुमको तुम भी मुझको अपनाना
मैंने प्यार........
सचीन निरंजन केजरीवाल
Saturday, May 9, 2009
गम के सिवा
कुछ नही है इसके सिवा, देने को कुछ गम के सिवा
जिंदगी भी खाली है, नही है कुछ गम के सिवा
गर रास आए तुमको साथ मेरा
चाहना न कभी किसी को मेरे सिवा
चाहत में तेरी डूबा हर लफ्ज है
यादो में तेरी खोया हर नगम है
कागज पर भी कुछ नही तेरे सिवा
जीवन के हर पल में तुम
मेरे आज कल में तुम
बाकि नही है अब कोई मेरा निशा
कुछ नही .......
अपनी जिंदगी में पहली बार आप के इस लेखक को प्यार हुआ है इससे इश्क हुआ है ये नगम मेरी अपनी उसी प्यार के नाम
आपका सचीन निरंजन केजरीवाल
Sunday, March 1, 2009
ये क्या जी रहे हम
सांसे है बाकि युही, चल रहे है कदम
यह क्या.......
जो तेरा साथ नही जिंदगी में तो कोई बात नही
सब कुछ है यहाँ हर पल, एक बस हम ही नही
यह क्या जी .....
सब है पर सुना-सुना
दर भी मेरा टुटा-फूटा
यह जीना भी क्या है जीना सनम-२
यह क्या जी रहे हम...
रोते हुए भी हँसता हूँ मैं
पर सब कहते रोता हूँ मैं दर्द कहाँ ले के जाऊँ सनम
ye kya ji rahe ...
sachin
Monday, February 16, 2009
लव डे
दिलवालों की बात है आज
हम तोह है पत्थर दिल, हमारी क्या औकात है आज
कहाँ फसा रहे हो हमे हुस्न वालों के झमेलों में
हम तो फेस है, गुर्वातों के मेलों में
सचीन
