Thursday, August 20, 2009

गजल

हम न आए दिल में तेरे 
और न ख्याल ही आया 
हमारे दिल में तुम जो हो 
इस बात पे भी गुमां न आया 
तुम न आए मेरे जहाँ में
हम तुम्हारे हो गए 
हमारी दुनिया सुनी सही 
जो तुम्हारी दुनिया है सजी हुई 
बर्बाद हसरत है अपने दिल की 
जो तुम न आए तो कुछ नही 
दोस्त-दोस्त कहते-कहते 
भूल गए कब ख़बर नही 
हम न भूले न भूलेंगे तुमको 
कह रहे सच झूठ नही 
संग तुम्हारे है एक दुनिया 
साथ मेरे कोई नही 
चलता हूँ साये संग तेरे 
मेरा साया कहीं नही 
सोचते हो सब देखता हूँ 
पर इन नजरों में अब कोई नही 
पता है हमको हो दूर तुम हमसे 
आश भी मेरे नजदीक नही 
हम न आए दिल में तेरे और न------