जिधर बही हवा बह गए हम
दिल ने कहा जिधर निकल गए हम
सडको की धुल से हो के रह गए हम
बारिश का पानी बन बह गए हम
जिधर बही -----
दिल ने ------
जो खिली धुप गगन में तो जल गए हम
बिखरी धरा पे चांदनी तो बिखर गए हम
हर हवा के झोकों संग हो गए हम
दिल ने -----
दिवाली की रात में जल गए हम
दिये से बन के रह गए हम
जो आई होली तो भींग गए हम
काले-पीले रंगों में खो गए हम
प्यार का रंग जो न मिला जीवन में
बाकी रंगों में तो घुल गए हम
दुःख ही सही,तकलीफ ही सही
दर्द,चोट,ठोकर ही सही
हर चीज को सह गए हम
दिल ने------