Thursday, August 20, 2009

हवा

जिधर बही हवा बह गए हम
दिल ने कहा जिधर निकल गए हम 
सडको की धुल से हो के रह गए हम 
बारिश का पानी बन बह गए हम 
जिधर बही ----- 
दिल ने ------ 
जो खिली धुप गगन में तो जल गए हम 
बिखरी धरा पे चांदनी तो बिखर गए हम 
हर हवा के झोकों संग हो गए हम 
दिल ने ----- 
दिवाली की रात में जल गए हम 
दिये से बन के रह गए हम 
जो आई होली तो भींग गए हम 
काले-पीले रंगों में खो गए हम 
प्यार का रंग जो न मिला जीवन में 
बाकी रंगों में तो घुल गए हम 
दुःख ही सही,तकलीफ ही सही 
दर्द,चोट,ठोकर ही सही हर चीज को सह गए हम 
दिल ने------