विचारों के बीज बोता है
और शब्दों की फसल काटता है
मेहनताने में मिलती है मुझे
चंद कहानियां और कुछ कविताएं
और जब कभी सुखा पड़ता है तो
मैं इन्ही कहानियों और कविताओं से
अपना काम चलाता हूं
sachinkejriwal1@gmail.com
अपना काम चलाता हूं
हां वो एक कबीला हैबेढंग से लोग रहते हैंजो सिर्फ गुनहगार हैंहो सकता है कुछ अच्छे भी होंजिनके होने पर भी शक हैयाद है कुछ सालों पहलेकितने कबीले वालों नेकितनी तबाही मचाई थीये पागल घोड़े से हैं बसलगाम कस लो इनकीज़रा नरमदिली से पेश आओफिर देखो कैसे येतुम्हारे घर तुम्हारे शहरतबाह करते दिखेंगेसख्त रहो डटे रहोरहस्य कुछ नहीं है इन कबीलों मेंसब के सब बे पर्दा हैंदुनियां जानती हैसब जानते हैंये दुर्दांत दरिंदे हैंहत्यारे हैं लुटेरे हैंबस यही एक बात है इनमेंजिससे सब खौफ में हैं