Sunday, May 2, 2021

किसान

 मैं वो किसान हूं जो
विचारों के बीज बोता है
और शब्दों की फसल काटता है
मेहनताने में मिलती है मुझे
चंद कहानियां और कुछ कविताएं
और जब कभी सुखा पड़ता है तो
मैं इन्ही कहानियों और कविताओं से

अपना काम चलाता हूं

Friday, April 9, 2021

कबीले वाले लोग

हां वो एक कबीला है
बेढंग से लोग रहते हैं
जो सिर्फ गुनहगार हैं
हो सकता है कुछ अच्छे भी हों
जिनके होने पर भी शक है
याद है कुछ सालों पहले
कितने कबीले वालों ने
कितनी तबाही मचाई थी
ये पागल घोड़े से हैं बस
लगाम कस लो इनकी
ज़रा नरमदिली से पेश आओ
फिर देखो कैसे ये
तुम्हारे घर तुम्हारे शहर
तबाह करते दिखेंगे
सख्त रहो डटे रहो
रहस्य कुछ नहीं है इन कबीलों में
सब के सब बे पर्दा हैं
दुनियां जानती है
सब जानते हैं
ये दुर्दांत दरिंदे हैं
हत्यारे हैं लुटेरे हैं
बस यही एक बात है इनमें
जिससे सब खौफ में हैं

Wednesday, April 7, 2021

दुनिया

काश के बदल जाती मेरे शब्दों से दुनिया
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनिया
खा लेता चांद समझ रोटी मैं तुझे
गर मां थाली में पड़ोस देती न दुनिया
तमाशे बड़े देखता हूं जहां में
नजारें भी गजब दिखती है दुनिया
हरारतें अपनी मिटा लेने के बाद
नामुराद समझ लेती है दुनिया
नाराज गर हो जाए सब अपने
तो दिलशाद हो जाती है दुनियां
काश के बदल जाती मेरे शब्दों से दुनियां
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनियां