काश के बदल जाती मेरे शब्दों से दुनिया
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनिया
खा लेता चांद समझ रोटी मैं तुझे
गर मां थाली में पड़ोस देती न दुनिया
तमाशे बड़े देखता हूं जहां में
नजारें भी गजब दिखती है दुनिया
हरारतें अपनी मिटा लेने के बाद
नामुराद समझ लेती है दुनिया
नाराज गर हो जाए सब अपने
तो दिलशाद हो जाती है दुनियां
काश के बदल जाती मेरे शब्दों से दुनियां
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनियां
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