Monday, February 26, 2024

मिर्च मशाला

 अब कौन इतना जोखिम उठाए
तीमादारी में दिन, रात बिताए

बातें सीधी साधी करें, हम जब भी करें
ज्यादा मिर्च मशाला अब कौन लगाए

शहर के जंगल

 बिकने वाली है अब जमीन मेरी गांव की
अब मैं शहर के जंगल का होने वाला हूं

Saturday, February 24, 2024

गुस्ताख सपने

 क्या क्या सपने संजोए थे
इस गुस्ताख दिल ने 'सचिन'
इल्म न था के सारे
गुस्ताख निकलेंगे 'सचिन'

Wednesday, February 14, 2024

सांसों का दलदल

 ये सांसों का दलदल
ये जीवन की खुशबू
फिर मौत का तांडव

रातों को जगना
सितारों को तकना

आंखों की चिलमन का हौले से गिरना
गिरते ही जाना, कभी न सम्हलना

खुराफाती दुनिया, नासाज सारे
बस बजते ही जाते, बेसुरे सारे

होली के रंगों सा सस्ता जमीर
दिवाली की रौनक में बिकता जमीर

ये पैसों की खन खन
वो रोटी की तड़पन

चांद को ताकते, निवाला समझते
थाली है खाली, पेट में ऐंठन

वो सूखे किस्से, वो झूठी दिलासा
दर्पण में दिखती, बेरंग काया

मासूम चेहरे, शफ्फाक सारे
बेदर्द खंजर, लहू के हैं प्यासे

ये सांसों की दलदल
ये जीवन की खुशबू

सरस्वती

 हम कैसे छोड़ दें सरस्वती को
जो कम से कम तो मेरी है

लक्ष्मी है क्या भरोसा
आज तेरी कल मेरी है

Tuesday, February 13, 2024

गुरबतों के मेलों में

 कहां फंसा रहे हो हमे
हुस्न वालों के झमेलों में

हम तो फंसे हैं पहले से
गुरबतों के मेलों में

Monday, February 12, 2024

आज की रात

हुस्न वालों की रात है आज
दिल वालों की बात है आज
हम तो ठहरे, पत्थर दिल
हमारी क्या औकात है आज

सांसों का बोझ

 मेरा कोई नही है
मैं किसी का नही हूं
बस ये सांसे हैं
जिनको मैं ढो रहा हूं

Sunday, February 11, 2024

कविता

 सालों का क्या है, आते हैं जाते हैं, पर
तुम तो सचिन के दिल में हो कविता

कविता

 मैंने सहेज रखीं हैं
तुम्हारी हर एक कविता
हर एक लफ्ज
अगर किसी दिन मिले
तो दिखाऊंगा
फिर समझना
कोई कितना दीवाना है
तुम्हारी कविताओं
तुम्हारे लफ्जों का कविता
 जिंदगी नर्क तो रहती, पर
तुम याद प्यार से आते

Saturday, February 10, 2024

बीमार इश्क

 कर जोड़ कोई इश्क के सामने खड़ा है
क्या जाने सचिन क्यूं इश्क बीमार पड़ा है

Friday, February 9, 2024

मेरे जैसा

 पेट खखोरता है
कलेजा जलता है
दुनियां भर की तकलीफों में
मेरे जैसा इंसान पलता है

Thursday, February 8, 2024

पत्थर

 कौन कहता है, पत्थर बेजान होते हैं
मुझसे पूछो, पत्थर भगवान होते हैं

कभी राम बनते हैं, कभी श्याम बनते हैं
दुनिया के सारे बिगड़े काम जिनसे बनते हैं

बलिदान

 कम नहीं है, बलिदान मातृभूमि के लिए
शब्दों का, करने वाले वो भी न कर सकें

दुत्कार

 एक प्यार ही तो मांगा था
तुम्हारा, प्यार से दुत्कार देते

Wednesday, February 7, 2024

दिल तो नही है

एक ज़माने में हुआ करता था जो
वो अब कहीं नहीं है

तेरे सीने में कुछ धड़कता तो है
"सचिन" पर वो दिल तो नही है

दास्तां

दीवारों की जुबां भी सुनी है कभी
दर्द भरी दास्तां ही बयान करती है 





ख्वाब

 तेरे जितने ख्वाब थे, ख्वाब ही रह गए
तेरे सारे ख्वाब, "सचिन" ख्वाब हो गए 

तेरा-मेरा

दिल तेरा, दरवाजा तेरा
दस्तक मेरी

फूल तेरा, खुशबू तेरी
सांसे मेरी

खुशी तेरी, हंसी तेरी
तकलीफें मेरी

जो जल रही है दुनिया
वो दुनिया मेरी

सजने वाली हर शय तेरी
उजड़ने वाली हर शब मेरी

आंखे मेरी, सपने मेरे
पूरे होते सब तेरे

इश्क तेरा, मुहब्बत तेरी
जुदाई मेरी

मिलना तेरा, छूना तेरा
तरसना मेरा

जुल्फें तेरी, उंगलियां तेरी
बस तकना मेरा

दिल मेरा, धड़कन मेरी
ठुकराना तेरा

Tuesday, February 6, 2024

दोनों ही नहीं हैं

 दिन दरिया है
रात समंदर
बहते दोनों ही नहीं हैं

यादों का बस
आना जाना
गुजरते दोनों ही नहीं हैं

तुम्हारा स्वागत

मेरे पिछले सारे गम बह गए
दो दिनों से बरसी
आंसुओं की बारिश में

ए सीतमगर
अब नए सितम सचिन पे ढाओ 
तुम्हारा स्वागत है

धुएं सा

 सिग्रेट के धुएं सा
हवा में उड़ रहा हूं
जलाती है दिल को ये
और मैं जल रहा हूं
जाने कब होऊंगा खाक
मैं बन जाऊंगा राख
इस दुनिया से दूर बहुत
जाने की अब सोच रहा हूं
 यूं मेरे नाम के साथ
जी लगाया न कीजिये
मेरा जी मचलने लगता है

बार बार

वो पूछते हैं बार बार, क्या बात है
कैसे बताएं उन्हें, ये दिल की बात है

चांद की कटोरी

 चांद की कटोरी से
रौशनी जो निकलेगी
शाम सुनहरी
ले के वो लौटेगी

यादों में तेरी शाम जो कटेगी
लगता है शाम ये 
जां ले के ही मानेगी

सुमन

 सुमन तेरी खुशबू में, डूबा है ये मन
सांसे मेरी कह रही, तुझे जुड़ा है तन

देखा तुम्हे जब से, खोया खोया सा रहता हूं
गर करो तुम यकीन, तेरे लिए ही बना हूं

दिल का नगर

 जंगल जंगल घूमते हो क्यूं
छोड़ के मेरे दिल का नगर

यहां भी बसंत आई हुई है
देखो गुजर गया पतझड़

सचिन

 तेरे सारे दोस्त, जहीन लोगों में शुमार हैं
और एक तू है सचिन, जाहिलों में भी नही

Monday, February 5, 2024

हिज़्र

हम मिलेंगे हिज़्र में आशिक़ मेरे
ये अपनी मुहब्बत का वादा रहा

Sunday, February 4, 2024

 आग नही अब मुझको जलाती है
याद तेरी जब मुझको सताती है

बारिश नही अब मुझको भींगोती
आंसू मेरे बस मुझको रुलाते हैं

छींक

 शब्दों से खेलती, तुम्हारी उंगलियां
मुझे विस्मृत करती हैं
भूल जाता हूं मैं, सब कुछ
बस तुम्हारी छींक याद रहती है
 मेरे दुख की कोई, सीमा नहीं
मुझको मिला है दुख इतना
मैने तो बस, प्यार किया
लूटी नही कोई दुनिया

Friday, February 2, 2024

 रात के अंधेरे में अपराध करू
 के 
दिन के उजाले में मेहनत करू 
मैं 
सोचता हूँ 
दिन रात का फर्क 
मैं क्या करू

नर्क

 तुम चले गये हो मुझे पता है
एक गम है
तुम नहीं आओगे मुझे पता है
एक गम है

जाना था चले जाते
जाते जाते कह जाते
बिन कहे गये हो 
एक गम है

राह निकलती कहाँ है कोई
अब के मैं गम से निकलु
ये भी एक गम है

एक प्यार ही तो माँगा था
प्यार से दुतकार कर देते

जिंदगी नर्क तो रहती
तुम प्यार से याद आते

अब भी प्यार करता हूँ
गर न किया तो
ये नरक कैसे भूगतुंगा
जो तुमने दिया है
पर तुम कब मानते हो ये
तुमने दिया है 
ये भी एक गम है
 धर्म निभाते मानवता का
कितनों की बलि चढ़ गई

जाने कितनी मांओं ने जोहर किया
आबरू कितनों की ही लूट गई

अहिंसा धर्म नही कायरता है
माधव ये सिखलाते हैं

इंसानियत की आड़ में
गीता हाथ से छुट गई

दिल दुखे न फिक्र में इसके
रोज चिताएं सजती हैं

मानवता की आड़ में देखो
कैसे मानवता ही मरती है

Thursday, February 1, 2024

छल समझो

 पाठ अहिंसा छल समझो
गीता के उपदेश को समझो
होती अहिंसा परम धर्म तो
माधव क्यों कहते समझो

अक्षर

 अक्षरों की ओट से, झांकती है जिंदगी
अक्षरों की ओट से, दर्द बयां करती जिंदगी

सांसे

 न तुम मज़ा देती हो न सुकूँ
हमें तो आदत है तुम्हारी "सांसे"
 वायदे कर तुम चले गए 
निभा हम रहे हैं