मैंने सहेज रखीं हैं तुम्हारी हर एक कविता हर एक लफ्ज अगर किसी दिन मिले तो दिखाऊंगा फिर समझना कोई कितना दीवाना है तुम्हारी कविताओं तुम्हारे लफ्जों का कविता
सिग्रेट के धुएं सा हवा में उड़ रहा हूं जलाती है दिल को ये और मैं जल रहा हूं जाने कब होऊंगा खाक मैं बन जाऊंगा राख इस दुनिया से दूर बहुत जाने की अब सोच रहा हूं
यूं मेरे नाम के साथ जी लगाया न कीजिये मेरा जी मचलने लगता है