Wednesday, February 14, 2024

सांसों का दलदल

 ये सांसों का दलदल
ये जीवन की खुशबू
फिर मौत का तांडव

रातों को जगना
सितारों को तकना

आंखों की चिलमन का हौले से गिरना
गिरते ही जाना, कभी न सम्हलना

खुराफाती दुनिया, नासाज सारे
बस बजते ही जाते, बेसुरे सारे

होली के रंगों सा सस्ता जमीर
दिवाली की रौनक में बिकता जमीर

ये पैसों की खन खन
वो रोटी की तड़पन

चांद को ताकते, निवाला समझते
थाली है खाली, पेट में ऐंठन

वो सूखे किस्से, वो झूठी दिलासा
दर्पण में दिखती, बेरंग काया

मासूम चेहरे, शफ्फाक सारे
बेदर्द खंजर, लहू के हैं प्यासे

ये सांसों की दलदल
ये जीवन की खुशबू

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