अक्षत हूँ मैं क्षत कभी होता नहींमैं धरा हूँ,मैं गगन हूँभूतल में भी मैं ही हूँब्रह्म मैं हूँ, बिष्णु मैं हूँहर जन का स्वामी हूँ मैंटिके नही सामने दुश्मन कोईकरे जो क्षत मुझे ऐसा नही कोईकृष्ण मुझमे, राम मैं हूँहां हां मैं अक्षत हूँरवि है मुझमे, शनि हैमुझमे हर एक का स्वरुप हूँविपदा में मैं साथी हूँ,संघर्ष में विकराल हूँमान्यवर हूँ न नश्वर हूँक्यों की मैं अक्षत हूँमैं अग्नि हूँ,मैं हवा हूँमैं ही तो समंदर हूँचल हूँ मैं,अचल हूँ मैंकण-कण और पल-पल हूँ मैंद्वार मैं हूँ,भीत मैं हूँहर जन का मीत हूँ मैंसुख है मुझमे, दुःख है मुझमेभवसागर तो मैं ही हूँहां हां मैं अक्षत हूँपार्थ मैं हूँ, बंधू मैं हूँहर लेख और निबंध मैं हूँज्ञान हूँ अज्ञान हूँ,ज्योति मुझमे,ज्वाला मुझमेशीत की लहर हूँ मैंसाम, दाम, दंड, भेद, हूँ मैंहां हां मैं अक्षत हूँमोक्ष मैं हूँ,काम मैं हूँमृत्यु और आकाल मैं हूँशुभ हूँ मैं अशुभ हूँ मैंहर युग का आगाज मैं हूंसिखा है मुझमे, दिशा है मुझमेसुख दुःख का भंडार हूँहां हां मैं अक्षत हूँ
Wednesday, July 8, 2009
अक्षत
ख्वाइश
सुनता रहू आवाज तेरी, शब्दों को तेरे चुनता रहू
ख्वाइश नही दिल में कोई, बस तुझसे ही मिलता रहू
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
ढूंदु कहा पूछु मैं किस्से
तेरा पता कोई जाने नही
जाऊँ कहा सोचु मैं फिर से
रास्ता कोई मिलता नही
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
सुनता रहू ..................
तेरा निशा, दीखता नही
मेरा जहाँ, सजता नही
मेरा खुदा कुछ चुप सा है
मेरी जमी चलती नही
कहा है तू ................
सपनो में ही..............
सुनता रहू ...................
सचीन निरंजन केजरीवाल
ख्वाइश नही दिल में कोई, बस तुझसे ही मिलता रहू
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
ढूंदु कहा पूछु मैं किस्से
तेरा पता कोई जाने नही
जाऊँ कहा सोचु मैं फिर से
रास्ता कोई मिलता नही
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
सुनता रहू ..................
तेरा निशा, दीखता नही
मेरा जहाँ, सजता नही
मेरा खुदा कुछ चुप सा है
मेरी जमी चलती नही
कहा है तू ................
सपनो में ही..............
सुनता रहू ...................
सचीन निरंजन केजरीवाल
Monday, July 6, 2009
दुनिया से
हम अलग है दुनिया से, इस लिए अकेले है दुनिया में
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैंनेप्यार किया है, तुमसे सुनले ओ मेरी जाना
मैंने दिल दिया है, तुमको न इसको ठुकराना
वरना बन्जाऊंगा मैं एक अफसाना
हो जाऊंगा मैं तो दीवाना
मैंने प्यार......
ऐसा नही ये खेल है, ये तो दिलो का मेल है
इन दो दिलो को तुम मिल जाने को देना
मैंने प्यार....
कभी किसी से कहा नही जो कह रहा हूँ तुमसे
अपना मन है तुमको तुम भी मुझको अपनाना
मैंने प्यार........
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैंने दिल दिया है, तुमको न इसको ठुकराना
वरना बन्जाऊंगा मैं एक अफसाना
हो जाऊंगा मैं तो दीवाना
मैंने प्यार......
ऐसा नही ये खेल है, ये तो दिलो का मेल है
इन दो दिलो को तुम मिल जाने को देना
मैंने प्यार....
कभी किसी से कहा नही जो कह रहा हूँ तुमसे
अपना मन है तुमको तुम भी मुझको अपनाना
मैंने प्यार........
सचीन निरंजन केजरीवाल
Subscribe to:
Posts (Atom)
