Monday, July 6, 2009

दुनिया से

हम अलग है दुनिया से, इस लिए अकेले है दुनिया में
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल