इश्क में हम अपने क्या कर रहें थे
सोचते हैं अब ग़ज़ब कर रहे थे
न लोगों की परवाह, न कैमरों का डर
हम तो बस इश्क कर रहें थे
सारे शहर में फिरते थे यूं ही
कहीं से चलते और कहीं निकल रहे थे
देखते थे लोग हमें रुक रुक कर
अब सोचते हैं हम, क्या कर रहे थे
sachinkejriwal1@gmail.com
इश्क में हम अपने क्या कर रहें थे
सोचते हैं अब ग़ज़ब कर रहे थे
न लोगों की परवाह, न कैमरों का डर
हम तो बस इश्क कर रहें थे
सारे शहर में फिरते थे यूं ही
कहीं से चलते और कहीं निकल रहे थे
देखते थे लोग हमें रुक रुक कर
अब सोचते हैं हम, क्या कर रहे थे