Thursday, October 30, 2025

इश्क में

 इश्क में हम अपने क्या कर रहें थे

सोचते हैं अब ग़ज़ब कर रहे थे

न लोगों की परवाह, न कैमरों का डर

हम तो बस इश्क कर रहें थे

सारे शहर में फिरते थे यूं ही

कहीं से चलते और कहीं निकल रहे थे

देखते थे लोग हमें रुक रुक कर

अब सोचते हैं हम, क्या कर रहे थे

Monday, February 26, 2024

मिर्च मशाला

 अब कौन इतना जोखिम उठाए
तीमादारी में दिन, रात बिताए

बातें सीधी साधी करें, हम जब भी करें
ज्यादा मिर्च मशाला अब कौन लगाए

शहर के जंगल

 बिकने वाली है अब जमीन मेरी गांव की
अब मैं शहर के जंगल का होने वाला हूं

Saturday, February 24, 2024

गुस्ताख सपने

 क्या क्या सपने संजोए थे
इस गुस्ताख दिल ने 'सचिन'
इल्म न था के सारे
गुस्ताख निकलेंगे 'सचिन'

Wednesday, February 14, 2024

सांसों का दलदल

 ये सांसों का दलदल
ये जीवन की खुशबू
फिर मौत का तांडव

रातों को जगना
सितारों को तकना

आंखों की चिलमन का हौले से गिरना
गिरते ही जाना, कभी न सम्हलना

खुराफाती दुनिया, नासाज सारे
बस बजते ही जाते, बेसुरे सारे

होली के रंगों सा सस्ता जमीर
दिवाली की रौनक में बिकता जमीर

ये पैसों की खन खन
वो रोटी की तड़पन

चांद को ताकते, निवाला समझते
थाली है खाली, पेट में ऐंठन

वो सूखे किस्से, वो झूठी दिलासा
दर्पण में दिखती, बेरंग काया

मासूम चेहरे, शफ्फाक सारे
बेदर्द खंजर, लहू के हैं प्यासे

ये सांसों की दलदल
ये जीवन की खुशबू

सरस्वती

 हम कैसे छोड़ दें सरस्वती को
जो कम से कम तो मेरी है

लक्ष्मी है क्या भरोसा
आज तेरी कल मेरी है

Tuesday, February 13, 2024

गुरबतों के मेलों में

 कहां फंसा रहे हो हमे
हुस्न वालों के झमेलों में

हम तो फंसे हैं पहले से
गुरबतों के मेलों में

Monday, February 12, 2024

आज की रात

हुस्न वालों की रात है आज
दिल वालों की बात है आज
हम तो ठहरे, पत्थर दिल
हमारी क्या औकात है आज

सांसों का बोझ

 मेरा कोई नही है
मैं किसी का नही हूं
बस ये सांसे हैं
जिनको मैं ढो रहा हूं

Sunday, February 11, 2024

कविता

 सालों का क्या है, आते हैं जाते हैं, पर
तुम तो सचिन के दिल में हो कविता

कविता

 मैंने सहेज रखीं हैं
तुम्हारी हर एक कविता
हर एक लफ्ज
अगर किसी दिन मिले
तो दिखाऊंगा
फिर समझना
कोई कितना दीवाना है
तुम्हारी कविताओं
तुम्हारे लफ्जों का कविता
 जिंदगी नर्क तो रहती, पर
तुम याद प्यार से आते