Friday, February 2, 2024

 धर्म निभाते मानवता का
कितनों की बलि चढ़ गई

जाने कितनी मांओं ने जोहर किया
आबरू कितनों की ही लूट गई

अहिंसा धर्म नही कायरता है
माधव ये सिखलाते हैं

इंसानियत की आड़ में
गीता हाथ से छुट गई

दिल दुखे न फिक्र में इसके
रोज चिताएं सजती हैं

मानवता की आड़ में देखो
कैसे मानवता ही मरती है

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