कसबिन कसे कसनी को कस से
कसनी में अपनी कसक को कस से
पत छोड़ पतिता बन गई , मनिका से बनी मंथर
पत्तेर बन उर गई वो , मेरे अंदर की मृगाछी
मवास में मर्दन हुआ मेरा
मरल उतरा आंखों का मेरी
पिशुन किया मेरे प्रिय ने, कुपंथ दिया मेरे अपनों ने
द्वीप जो था मेरा उसी ने कर "कर"इस घट को दुख्लाया
कहवा जाए अब कोई मनिका,इस रंन्य में सभी मधंद
मधुक लालसी मंडरा रहे करने को मर्द्धन
ऐसे पिसाच भी यहाँ घूम रहे
बिन पत जो माँ का भी कर दे मर्दन
माँ सु थी कभी यह कसबिन
इसको बाज़ार में लाया किसने?
इसको कसबिन बनाया किसने?
चंद्र बदन चंद्र नयन वीना
हातों में जाम थमाया किसने?
इसको कसबिन बनाया किसने?
नाग सिंघासन हुआ जिसका
वन आँगन हुआ जिसका
हर जन आया इससे
फिर यह इसको लाया किसने?
इसको कसबिन बनाया किसने
सचिन
Friday, June 13, 2008
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