Sunday, June 22, 2008

मेरा मकान

मैं दुखी हूँ, उन सभी बातों से
जो मैंने कभी की थी किसी से
या फिर किसी दुसरे ने की थी
कभी कुछ बातें मुझसे
मैं खफा हूँ उनसे जो जन्वारोंको
जानवरों से लडाते है
मगर उनसे ज्यादा दुखी हूँ,मैं उनसे हूँ
जो ख़ुद तो लड़ते है
औरों को भी जानवर की तरह लड़ने को मजबूर कर देते है
मैं दुखी हूँ उन तमाम चीजों से
जो कभी दुनिया में देखि थी
मैंने और अफ़सोस
की अब भी उन्ही चीजों को
देख रहा हूँ, इस धरा पर
शिर्फ़ एक अन्तर के साथ
सभी चीजे पहले से ज्यादा
दुसित हो गई है
फिर भी हमे संतोष नही
और विस भर रहे है हम
मैं ........
सचीन

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