Tuesday, June 17, 2008

मेरी खामोश धडकनों को .....

मेरी खामोश धडकनों को
तुम धड़कने की वजह न दो
मेरे सोये हुए अरमानो को
तुम जगने की वजह न दो
जो धड्केगा दिल तो ये कहेगा
की यह चाहता है तुमको
जो ........... अरमान मेरे तो
देखेंगे ख्वाबों में भी तुमको
चाहतें है हम तुमको धड़कन मेरी हर पल कहेगी
चाहे हो जो हर पल मेरे अरमानों ख्वाबों में तुम ही रहोगी
तुम इन धडकनों को,इन ख्वाबों को कोई ऐसी
वजह न दो
मेरी खामोश ........
दिल तोड़ दोगी तुम मेरा कभी
दोगी मायूसी इसको कभी
दिल की हसरत, मेरी खामोश धडकनों
को सोने दो
मेरे खामोश ......
तड़पने से याद में तेरी अच्छा है,खामोश ही रहने दो
ख्वाबों को टूटने से अच्छा इन्हे पलकों में बंद रहने दो
मायूसी मिलने से अच्छा,खामोशी में जीने दो
मेरी खामोश ..........
सचिन

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