Monday, June 16, 2008

वो आये मय खाने .....

वो आये मय खाने पे हमारे
और जाम छुए बिना ही चल दिए
वो आये दर पे हमारे
और हमे चखे बिना ही चल दिए
गम नही इस बात का की वो जाम न छुए
गम है इस बात की,वो बिन चखे ही चल दिए
वो आये ............
उम्मीद के चिराग रोशन है अब भी
आ जाए दर पे हमारे फिर भी
न जाने जलेंगे कब तक हम इस खावाहिश में -२
न जाने छुए कब प्याले को वो हमारे
या फिर एक और बार बिन चखे ही वो चल दे
वो आये ............
सचिन

No comments: