Tuesday, June 17, 2008

जिंदगी-धुआं

दर्द अपना हम किस-किस से छुपायें
औरों का तो न पता,ख़ुद से कैसे छुपाये
धुआ हो गई है जिंदगी यह हमारी
उड़ गई न जाने कब खुशिया हमारी
दर्द .........
न मिलने का तुमसे हमे गम है
................... का तुमसे,गम है
दर्द है मुझको तेरे दूर चले जाने का
उम्मीद है हमे तेरे लौट आने की
जलते है चिराग मन में,उम्मीदों के
खो गई है रौशनी,पर धुए में
धुआं बन गई जब से जिंदगी, यह हमारी
बात यह हम किस-किस से छुपाये
दर्द............
हर चेहरा लगता है तुम्हारा इन आंखो से
कुछ और देखना नही गवरा इन आंखों से
धुआ हो गई जिंदगी हमारी हम कैसे छुपाये
इस धुए में हम ढूँढने ख़ुद कों कहाँ जाए
छोड़ गए रस्ते में हमे हमसफ़र हमारे
डरा इस बातका हम कैसे ख़ुद से छुपाये
दर्द ,..............
सचिन

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