मैं कैसे कहू, की मुझे प्यार हो गया है
पहली बार में, ये दिल निशार हो गया है
खवाब हजारों ये देखने लगा है
जाने-४ ये क्या सोचने लगा है
मैं कैसे -२
बारिश भी है,
शाम का मंजर भी है
जो तू नही, तो कुछ भी नही है
जाने क्यों बेकरार दिल, ऐसे में होने लगा है
मैं कैसे -२
भीर है पर, तन्हाई सी
खुशिया है पर, रुसवाई सी
जाने क्यों मेरे साथ ऐसा होने लगा है
मैं कैसे -२
रातो को नींद अब आती नही,
दिन को चैन कही मिलता नही,
सोचा न था कभी ऐसा होगा
मेरे साथ जो यह होने लगा है
मैं कैसे –2
सचीन
Wednesday, June 18, 2008
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