लाडला है ये सब का, हरियाली माँ है इसकी
विचार नेक है पर्वत से, करता है रक्षा प्रदेश की
लोकप्रियता के सर्वोच शिखर पे
है हर जन-मानस के मन में
नही चाहिए धन-दौलत, नही अविलाषा ऐश मौज की
लाडला है .......
मिलता सभी से बन अपना
सुनता है फरियाद सबो की
है सब कुछ इसका औरों के लिए
पिता का प्यार,माँ की ममता
नही है इसका अपना कुछ भी
लाडला है ........
राजा है हर मन का,हर मन में छबी 'पवन" की
जन कल्याण की भावना लिए, बर्षों से ........ है लोक तंत्र में
नही बटा है, नही बटेंगा प्यार इसका गैरों में
लाडला है ......
देवो सा है तेज़ सर पे सत्ता की मुरली हातो में
अडिग विश्वास से चलते पाव नही है दोष कोई मन में
हनु का है आशिस इशको, तीस्ता का आँचल इस पर
लाडला है .......
अवतार है बनवासी सा, बस्ती है मन में जनता
राम राज्य सा आलम है, नही किसी को चिंता कोई
प्रगति के पथ पर नित आगे बढ़ना
साधा हुआ लक्ष्य है इसका
लाडला है .......
............. चल नही चलता ये, पवन बेग सा चलता है
बने हर कोई ऐसा, यही कामना हर जन करता है
लाडला है ......
चारों तरफ़ लगे है मेले वन, उपवन, पहरों के
देवो की है कृपा विशेष , इस खिलते चमन नज़ारों पे
खड़ा है हिम सीना ताने, आंधी,तूफानों,बार्शतों में
दूर से रखे नज़र दुश्मन मुल्क जवानों पे
ऐसा ही है ये सपूत एक, माँ भारती के खानों से
लाडला है ......
सचिन
Monday, June 16, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment