वो हँसती है मुझपे, खिलखिलाके
नही मुझपे नही, मेरी बेबसी पे
लगता नही हूँ, मैं कही से
पर हूँ बेबस मैं अंदर से
एक नज़र मोहब्बत मुझको चहिये,
छलकते पय्माने जाम से
एक पैगाम मुझको चहिये
थर-थाराते लबों की कसम
एक लव मुझको चहिये
इच्छा नही अनंत सागर की
बस एक गहरा सागर मुझको चहिये
डूब जाऊँ मैं जिसमे एक ऐसा गागर चहिये
दूंद्ता हूँ मैं जिसको जाने वो है कहाँ
इस दिल को बस तस्वीर उसकी चहिये
कम्पन भरी वो चंचल काया
जाने कहाँ छुपी हो माया
एक पल भी जो ठहरता नही कही,
तेरा वो साया मुझको चहिये
खिल रहा है कही एक कमल मेरे दिल में
उस कमल की सुगंध मुझको चहिये
मेरी इस बेबसी पे हँसती हुई, तेरी सूरत नही .........
सचिन
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