Thursday, June 19, 2008

ऐ शहर वालो

दुआ करो तुम ऐ शहर वालो मेरे लिए
मेरी भी हो सुबह कभी
हो शाम मेरी भी कभी,इसके लिए
दुआ करो----२
तनहा हूँ, मैं कुछ आज-कल, तनहा थे तुम भी कभी
आबाद हो अब तो तुम, अब आबाद करोगे कभी
मुझको भी है उम्मीद
दुआ करो---२
आशाए है पर क्यों साथ तुम्हारा नही, हर पल में बस चिंताए है
बचू इनसे कोई ऐसा ठिकाना नही
फिर भी उमीदो का दामन, थामे आया हूँ मैं तुम्हारे शहर,
ऐ शहर वालो
दुआ करो ।
सचिन

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