Monday, June 16, 2008

असंतोष की रेखा

वो जो में असंतोष की रेखा जीता है

पंडित है फिर भी लक्ष्मी की पूजा,

औरों से ज्यादा करता है

वो जो .......

सरस्वती से दूर-दूर का है उसका रिश्ता

बस और बस लक्ष्मी का ही उसको उपासक है जाना जाता

वो जो .....

ये झूठा अस्वासन देता है ख़ुद को,की हमसे बड़ा कोई ज्ञानी नही है

लेकिन "सचिन" जानता है की उनमे क्या है,

और क्या नही है

दूसरो को प्रभावित करने को, उनकी जनम पत्री बाचताये

पर अपनी जनम पत्री औरो से बच्वाता ये

दुश्रे की हातों की रेखाओं का ज्ञान है इन्हे

हर परिस्थिति के पत्थरों का धयान है इन्हे

फिर भी थैला लिए दर-दर घुमे जाते है

वो जो असंतोष ................

जहा से इश्वर का स्मरण है करते

वही पे झूट फरेब पले है रखते

न जाने दिन में कितनी बार ये

हरिॐ का उच्चार्रण है करते

सांसारिक मोह से वो बच नही पता

पहले लक्ष्मी की कामना है करता

वो जो असंतोष ..............

सचिन

नोट- ये सिर्फ़ एक लेखक की कल्पना है जिस पर कोई भी विवाद नही किया जा सकता

धन्यबाद

सचिन

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