कुछ देर,कुछ दूर,
तेरा साया साथ चलेगा क्या -२
जल रहा हूँ मैं तो कबसे -२
आग में हा इस आग में
मुझे ठंडक देगा क्या तेरा साया
कुछ देर -२
यादों में तेरी, भटक रहा हूँ
बिन तेरे दिलबर जी रहा हूँ
ये न पूछो जी जिंदगी क्या
मोम की तरह पिघल रहा हूँ
मेरे साथ ढलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
कुछ देर ...
सचीन
Friday, June 20, 2008
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