वृधा तन में यौवन मन, सांसे टूटी जैसा जीवन
वृधा ......
कंधो पे बोझ जैसा जीवन ,
वृधा तन में यौवन मन कंधो पे बोझ,
बचपन की सोच
वो घुटनों पे चलना, हाथो को टेकना
आंखो से,फिर सपनो को देखना
बीते कल को भूल कल की सोचना
मन जख्मी है कल की सोच , आज तन
वृधा .......
वही दौड़ वही भाग
वही जोर वही गुना
जिंदगी का फिर वही दौर
जहा से चला था इस जहाँ के लिए
वही खड़ा हूँ इस जहाँ को लिए
बचपन के साथ यौवन , यौवन के साथ जीवन
जीवन तन मन, रुक गया है सब कुछ
जैसे रुकी हो में सिने में धड़कन
वृधा ..............
सचिन
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