Tuesday, June 10, 2008

आप के लिए

माननीय कवियों, लेखकों, गीतकारों एवं अन्य बुद्धिजीवियों सर्वप्रथम आप सब को आप के सचिन का सादर प्रणाम, मुझे पता नही की मैं कैसे आप जैसा बन सकता हूँ ! पर मुझे उपर वाले ने सिर्फ़ और सिर्फ़ लिखने के लिए ही इस जहाँ को दिया है और मुझे उम्मीद है की मैं इस कसौटी पर खरा उतरूँगा, पर इसका फ़ैसला तो आप को ही करना है, मैं तो बस कोशिश कर रहा हूँ! उम्मीद है आप की कसौटी पर खरा उतरूँ।

मैं आप सब से यह वादा करता हूँ की मैं बहुत जल्द आप की अदालत में अपनी कुछ रचनाये फैसले के लिए भेजूंगा और आप की राय सलाह चाहूँगा।

आप का सचिन

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