Tuesday, June 17, 2008

हर पल की कसम

इस बिगड़े हुए मौसम की कसम,
मेरे उजड़े हुए चमन की कसम,
हर पल में जो हो तुम
हर उस पल की कसम
तेरी काली जुल्फों की कसम
रात के अंधेरों,दिन के उजाले की कसम
मेरे नाजुक दिल,नादा मन की कसम
छाई है जो घटाए, इन घटाओं की कसम
बरश्ते हुए पानी की कसम,
भूल गई हो जो तुम,
हर उस भूले हुए लम्हों की कसम
साथ जो बिताये थे हमने , हर उस बीते हुए पल की कसम
कैसे कहें कितना चाहते है,
तुमको हम सनम
सचिन

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