बिन तुझे याद किए
आँख मेरी लगती नही
बिन तेरे ख्याल के
मेरी सुबह होती नही
क्या करू मैं गर
मुझे तुमसे जो प्यार है
क्या करू मैं गर
तुमसे जो इक्र्रार है
बिन तुझे -२
ऐसा क्यों होता है मैंने सोचा नही
सुना था पहले पर जाना नही
क्या ऐसा ही ये प्यार है
बिन तुझे -२
सचीन
Thursday, June 19, 2008
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2 comments:
हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.
अच्छी रचना. लिखते रहिये. और भी उम्दा लिखेंगे, उम्मीद करते हैं. शुभकामनयें.
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उल्टा तीर
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