तेरे ही रंग में,रंग गया मैं
तेरा ही हो के,रह गया मैं-२
देखा तुझको खो गया मैं-२
देखते ही तेरा हो गया मैं
तेरे रंग.......
बिन तेरे सब बेकार है,
यह दुनिया भी बेजार है
कैसे कहूँ मैं, हाँ कैसे कहूँ
मुझको हो गया प्यार है
तेरे ही रंग................
तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन की, खुशबू
हो तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन ....
घुल गया-२ मैं
तेरा ही हो के रह गया मैं
तेरे ही ....
जब से मिले हो तुम मुझको जाना,
ख़ुद को ही न पहचाना
हाय ये कशिश,हाय ये अदा -२
हो गया इनपे मैं फ़िदा
अब क्या करू,-२ मैं कुछ तो बता
लूटा तुने मुझे जाने वफ़ा
तेरे.................
सचीन