Sunday, June 22, 2008

बाकि है अभी

आशा की किरने बाकि है अभी
उषा की बूंदे बाकि है अभी
निर्मोही संसार में,
कुछ दिन बाकि है अभी
नास्वर शरीर में चंद सांसे बाकि है अभी
लक्ष्य को पाने की चाहत, में चलना है अभी
जो दूर तो है पर ज्यादा दूर नही
देर से ही सही, पर उसे पाना है अभी
दूर तक चलना पड़े तो चलना है अभी
आशा की .............
सितारों की बिच में चाँद को चमकना है अभी
सितम है चांदनी पे अंधेरों का अभी
सितम की ये काली रात ...........है अभी
चमकता चाँद निकलना है अभी
सचीन

मेरा मकान

मैं दुखी हूँ, उन सभी बातों से
जो मैंने कभी की थी किसी से
या फिर किसी दुसरे ने की थी
कभी कुछ बातें मुझसे
मैं खफा हूँ उनसे जो जन्वारोंको
जानवरों से लडाते है
मगर उनसे ज्यादा दुखी हूँ,मैं उनसे हूँ
जो ख़ुद तो लड़ते है
औरों को भी जानवर की तरह लड़ने को मजबूर कर देते है
मैं दुखी हूँ उन तमाम चीजों से
जो कभी दुनिया में देखि थी
मैंने और अफ़सोस
की अब भी उन्ही चीजों को
देख रहा हूँ, इस धरा पर
शिर्फ़ एक अन्तर के साथ
सभी चीजे पहले से ज्यादा
दुसित हो गई है
फिर भी हमे संतोष नही
और विस भर रहे है हम
मैं ........
सचीन

कल के लिए

रख दिया है मैंने दिल,
कल के लिए
मेरी जा को रख दिया है
तेरे लिए
इंतजार तेरा है मेरा प्यार तेरा है
मेरा प्यार तेरा है -२
रख दिया है प्यार को यार के लिए
रख दिया है ..........
तड़प रहा था,मेरा दिल तेरे लिए,
भटक रहा था, रात में तेरे लिए
दूंदता फिरे ये कहाँ तुमको,
न पूछो यार रहने दो ये भी कल के लिए
रख दिया ....
मेल में,रेल में,
बस में ,कार में,
हर जगह बेकार में,यु ही तेरे प्यार में
भटक रहा था मेरा दिल-२
जाने ये कब से
रख दिया ....
सचीन


Friday, June 20, 2008

तेरा साया

कुछ देर,कुछ दूर,
तेरा साया साथ चलेगा क्या -२
जल रहा हूँ मैं तो कबसे -२
आग में हा इस आग में
मुझे ठंडक देगा क्या तेरा साया
कुछ देर -२
यादों में तेरी, भटक रहा हूँ
बिन तेरे दिलबर जी रहा हूँ
ये न पूछो जी जिंदगी क्या
मोम की तरह पिघल रहा हूँ
मेरे साथ ढलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
कुछ देर ...
सचीन

Thursday, June 19, 2008

क्या ऐसा ही ये प्यार है?

बिन तुझे याद किए
आँख मेरी लगती नही
बिन तेरे ख्याल के
मेरी सुबह होती नही
क्या करू मैं गर
मुझे तुमसे जो प्यार है
क्या करू मैं गर
तुमसे जो इक्र्रार है
बिन तुझे -२
ऐसा क्यों होता है मैंने सोचा नही
सुना था पहले पर जाना नही
क्या ऐसा ही ये प्यार है
बिन तुझे -२
सचीन

ऐ शहर वालो

दुआ करो तुम ऐ शहर वालो मेरे लिए
मेरी भी हो सुबह कभी
हो शाम मेरी भी कभी,इसके लिए
दुआ करो----२
तनहा हूँ, मैं कुछ आज-कल, तनहा थे तुम भी कभी
आबाद हो अब तो तुम, अब आबाद करोगे कभी
मुझको भी है उम्मीद
दुआ करो---२
आशाए है पर क्यों साथ तुम्हारा नही, हर पल में बस चिंताए है
बचू इनसे कोई ऐसा ठिकाना नही
फिर भी उमीदो का दामन, थामे आया हूँ मैं तुम्हारे शहर,
ऐ शहर वालो
दुआ करो ।
सचिन

चलेगी दुकान मेरी

चलेगी दुकान मेरी मुझको भरोसा है,
आएगा कस्तम्बर मेरा मुझको भरोसा है,
किसी की तुम सुनो नही,
करो वही जो काम अपना है,-

चलेगी ---२
देर है थोरी पर अंधेरे नही,
नई है दुकान मेरी सब के लिए,-
चाहे कोई कुछ भी कहता रहे,

करू मैं वही जो काम अपना है
चलेगी -१
खाली है अभी, पर जरुर भरेगी
एक दिन कस्तम्बर की लाइन यहाँ लगेगी
मॉल भी होगा, तब मानी भी होगी-2
लाइफ अपनी टेंशन फ्री होगी
चलेगी---२
जितना है कर्जा, सर पे सब मैं उतारूंगा

हंस-हंस -हंस के
लोगों को कर्जा, तब मैं ही दूंगा
मेरी भी तो पुछ होगी बाज़ार में
मेरा भी कोई मुकाम होगा
आएगा शहरमें जो भी bandhaमिल के मुझसे जाएगा
चाहे वो स्टार हो या हो सुपर स्टार
मुझसे मिलने को वो दौरा दौरा चला आएगा
चलेगी ---२
देखते है अभी सब मेरी इस दुकान को
पहुचायेंगे मिल के सब मुझे अपने मुकाम को
मुझको कुछ फ़िक्र नही अपना खुदा अपने साथ है
चलेगी ---२

सचिन

कातिल रात

रात है,हाँ ये रात है,-२
इसमे कोई, बात है,
जो दिखती नही, पर है
कही ये कैसी रात है
रात है .......
राज की ये, बात है, कातिल है हर कोई यहाँ
हर कोई शिकार है, नाम केसब दोस्त है,
दुश्मनी सब में यार है
जाने ये, कैसी बात है
इस बात में कोई, राज है
रात है......
अँधेरी है, काली है,
बड़ी भयानक रात है
तारों का है, शमा कातिल बड़ी ये रात है,
रात है .....
सचिन

Wednesday, June 18, 2008

सदा के लिए

तेरी सूरत मेरी आँखों में बस गई है
सदा के लिए
तेरी खुशबू मेरी सांसो में बस गई है
सदा के लिए
आ आ के मिल जा मुझसे तू
सदा के लिए
बिन तेरे जीना एक होता नही
गुजर जाए पल भी ऐसा होता नही
करू क्या मैं कोई बता दे
मुझे खुदा के लिए

तेरी सूरत --------२
तेरी खुशबू----२
सूरत तेरी इन आँखों में है
फिर भी तुझको दूंदता रहता हूँ मैं
आँखे तेरी नीली है मेरा घर इनकी गली है
इन आँखों में रहने दो मुझे
सदा के लिए

मैंने कभी ये कहा नही...

मैंने कभी ये कहा नही, के मुझे प्यार है तुमसे
पर कहते है लोग ये सब मेरे दोस्त
के मुझे कुछ न कुछ तो हुआ है
मैंने-२
खुदा ही जाने बात क्या है
क्यों इतना ये शोर है
मैंने ये सुना है इश्क पे नही किसी का कोई ज़ोर है
मैंने ---२
मैंने ये किया नही
मैंने कहा नही
पर कहते है लोग
सब मेरे दोस्त
के मुझे कुछ न कुछ तो हुआ है
मैंने ---२
सचिन

मुझे प्यार हो गया है ....

मैं कैसे कहू, की मुझे प्यार हो गया है
पहली बार में, ये दिल निशार हो गया है
खवाब हजारों ये देखने लगा है
जाने-४ ये क्या सोचने लगा है
मैं कैसे -२
बारिश भी है,
शाम का मंजर भी है
जो तू नही, तो कुछ भी नही है
जाने क्यों बेकरार दिल, ऐसे में होने लगा है
मैं कैसे -२
भीर है पर, तन्हाई सी
खुशिया है पर, रुसवाई सी
जाने क्यों मेरे साथ ऐसा होने लगा है
मैं कैसे -२
रातो को नींद अब आती नही,
दिन को चैन कही मिलता नही,
सोचा न था कभी ऐसा होगा
मेरे साथ जो यह होने लगा है
मैं कैसे –2
सचीन

Tuesday, June 17, 2008

जनाबे अली आ ...

जनाबे अली आ,आजा रे-२
हो दिल मेरा,तड़प रहा,
जब से तू, मुझसे दूर रहा-२
जनाबे अली आ .....
हाय क्या गम दिया,
मुझपे सितम किया,
जीना तो जीना मेरा,
मरना भी मुश्किल किया-२
जनाबे अली .........
तेरे लिए,मैं फिरता हूँ, बन के कब से बंजारा
प्यार में सब को लगता है,हो गया हूँ मैं आवारा
आजा,अब तो,आजा
जनाबे अली आ.......
सचिन