Tuesday, January 30, 2024

बस मुहब्बत

हर्फ ए आखिर नाम तुम्हारा
है लबों पे आया मुहब्बत

आखरी सांस आखरी मंज़र
है निगाहों में बस मुहब्बत

चलाओ खंजर ना निगाहों से
हम तो हैं घायल तुमसे मुहब्बत

उठाओ नज़रे हमारे जानिब
कुबूल हमें है तुम्हारी नफरत

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