Wednesday, January 10, 2024

चंद कविताएं

चंद कविताएं लगी हैं हाथ मेरे
माला विचारों की पिरोई हुई सी
थोड़ी शरमाई, थोड़ी सकुचाई
तो कहीं कहीं थोड़ी घबड़ाई हुई सी

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