Monday, January 29, 2024

तलबगार

 कोई दुकान देने आता है,
कोई मकान
क्या जाने कौन, कब आएगा
देने अपनी जां

हम तलबगार हैं, दिल के तुम्हारे
कब तलक जिए कोई 
इस ना-चिज के सहारे

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