वो कौन है जो लिप गया मिट्टी आसमां पर
ये बिछा दी चांदनी किसने सारी धरा पर
क्यूँ आसमां मटमैला है
क्यूँ धरा भी ठहरी है
हंसी छीन ली किसने दोनों कि
जाने क्यूँ गमगीं दोनों हैं
ज़ख्म देखने न सही
मुझे देखने तो आओ कभी
ये बिछा दी चांदनी किसने सारी धरा पर
क्यूँ आसमां मटमैला है
क्यूँ धरा भी ठहरी है
हंसी छीन ली किसने दोनों कि
जाने क्यूँ गमगीं दोनों हैं
ज़ख्म देखने न सही
मुझे देखने तो आओ कभी
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