क्यों पूजे हम तुमको, क्यों माने भगवान्
दिया है क्या तुमने हमको बना दिया शैतान
क्यों पूजे ----
आज नही, कल का नही कभी का नही है रिश्ता अपना
हो कहाँ तुम मुझको दिख जाओ भगवान
क्यों पूजे----
नही हो तुम मेरे अपने, पुरे किए नही कोई सपने
फ़िर हो कैसे तुम भगवान
क्यों पूजे -----
दुःख दिया है, दर्द दिया है
कर दिया जीवन को शमशान
तख्लिफों में जीते है हम, तुम कैसे हो भगवान
क्यों पूजे---
पत्थर हो तुम,माटी हो नही है तुम में जान
क्यों पूजे----
इस दिल को तुने जला दिया
सब कुछ तुने खाक किया
अब रहा नही मैं इन्सान
क्यों पूजे ----
सचीन निरंजन केजरीवाल
Thursday, August 20, 2009
हवा
जिधर बही हवा बह गए हम
दिल ने कहा जिधर निकल गए हम
सडको की धुल से हो के रह गए हम
बारिश का पानी बन बह गए हम
जिधर बही -----
दिल ने ------
जो खिली धुप गगन में तो जल गए हम
बिखरी धरा पे चांदनी तो बिखर गए हम
हर हवा के झोकों संग हो गए हम
दिल ने -----
दिवाली की रात में जल गए हम
दिये से बन के रह गए हम
जो आई होली तो भींग गए हम
काले-पीले रंगों में खो गए हम
प्यार का रंग जो न मिला जीवन में
बाकी रंगों में तो घुल गए हम
दुःख ही सही,तकलीफ ही सही
दर्द,चोट,ठोकर ही सही
हर चीज को सह गए हम
दिल ने------
गजल
हम न आए दिल में तेरे
और न ख्याल ही आया
हमारे दिल में तुम जो हो
इस बात पे भी गुमां न आया
तुम न आए मेरे जहाँ में
हम तुम्हारे हो गए
हमारी दुनिया सुनी सही
जो तुम्हारी दुनिया है सजी हुई
बर्बाद हसरत है अपने दिल की
जो तुम न आए तो कुछ नही
दोस्त-दोस्त कहते-कहते
भूल गए कब ख़बर नही
हम न भूले न भूलेंगे तुमको
कह रहे सच झूठ नही
संग तुम्हारे है एक दुनिया
साथ मेरे कोई नही
चलता हूँ साये संग तेरे
मेरा साया कहीं नही
सोचते हो सब देखता हूँ
पर इन नजरों में अब कोई नही
पता है हमको हो दूर तुम हमसे
आश भी मेरे नजदीक नही
हम न आए दिल में तेरे
और न------
तंगहाल जिंदगी
पता नही क्या हुआ आज कल
पहली बार अपनी तंगहाल जिंदगी में
कुछ कमी सी खल रही है
सजा भुगत रहा हूँ मैं उसकी
जो गलती मैंने की है
अपनी तंगहाल जिंदगी में
कुछ कमी सी खल रही है
गुनाहगार हूँ मैं ख़ुद का
पता नही कब कर दिया गुनाह मैंने
सोचा नही था कभी
जो कर दिया मैंने
सब कुछ था मेरे पास
अब कुछ नही है मेरे पास
ऐसा क्या कर दिया मैंने
होटों से हंसी,
आँखों से पानी
भी तो खो दिया मैंने
मैं किसी का कोई नही
है कोई जिसको हमपे यकीं नही
ऐसा क्या कर दिया मैंने
पर पहली बार
अपनी तंगहाल जिंदगी में
कुछ कमी सी खल रही है
बिद्या की देवी
हम कैसे छोड़ दे सरस्वती को,
जो कम-से-कम तो मेरी है
लक्ष्मी का है क्या भरोसा,
आज तेरी कल मेरी है
हम कैसे------
कृपावान है मुझपे ये बिद्या की देवी
कैसे किनारा कर ले हम, ये जो मेरी है
हम कैसे छोड़ ------
हूँ मैं गंवार अनपढ़ सा
फ़िर भी मुझपे दयावान है
ये सरस्वती तो मेरी है
हम कैसे छोड़------
लक्ष्मी है चंचल रूकती नही है
आज इधर तो कल उधर रहती है
सरस्वती तो संग सदा मेरे ही चलती है
फ़िर छोड़ दूं मैं कैसे
नाता तोड़ दूं मैंं कैसे
सब कहते हैं छोड़ दो
अपनी कलम को तोड़ दो
कहाँ जाऊंगा कर मैं ये,
घट सरस्वती का दुख्ला के
माफ़ न कर पायेगी मुझको,
ये सरस्वती जो मेरी है
हम कैसे --------
दीवाना
मैं दीवाना होने लगा हूँ, याद में तेरी जलने लगा हूँ
मैं क्या करू मैं प्यार में हूँ-४
आग नही अब मुझको जलाती है,
याद तेरी जब मुझको सताती है
बारिश नही अब मुझको भिंगोती है
आंसू मेरे अब मुझको भिन्गोते है
मैं क्या करू
मैं-४
तन्हाई मुझको अब डसती नही है
रुसवाई मुझको अब खलती नही है
आदत है जबसे जीने में ऐसे,
कुछ भी नही है सिने में तब से
अब क्या करू, मैं क्या कहू
मैं प्यार में हूँ -४
मैं प्यार में हूँ, हाँ मैं प्यार में हूँ
तेरे प्यार में हूँ, मैं प्यार में हूँ
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैं क्या करू मैं प्यार में हूँ-४
आग नही अब मुझको जलाती है,
याद तेरी जब मुझको सताती है
बारिश नही अब मुझको भिंगोती है
आंसू मेरे अब मुझको भिन्गोते है
मैं क्या करू
मैं-४
तन्हाई मुझको अब डसती नही है
रुसवाई मुझको अब खलती नही है
आदत है जबसे जीने में ऐसे,
कुछ भी नही है सिने में तब से
अब क्या करू, मैं क्या कहू
मैं प्यार में हूँ -४
मैं प्यार में हूँ, हाँ मैं प्यार में हूँ
तेरे प्यार में हूँ, मैं प्यार में हूँ
सचीन निरंजन केजरीवाल
Wednesday, July 8, 2009
अक्षत
अक्षत हूँ मैं क्षत कभी होता नहींमैं धरा हूँ,मैं गगन हूँभूतल में भी मैं ही हूँब्रह्म मैं हूँ, बिष्णु मैं हूँहर जन का स्वामी हूँ मैंटिके नही सामने दुश्मन कोईकरे जो क्षत मुझे ऐसा नही कोईकृष्ण मुझमे, राम मैं हूँहां हां मैं अक्षत हूँरवि है मुझमे, शनि हैमुझमे हर एक का स्वरुप हूँविपदा में मैं साथी हूँ,संघर्ष में विकराल हूँमान्यवर हूँ न नश्वर हूँक्यों की मैं अक्षत हूँमैं अग्नि हूँ,मैं हवा हूँमैं ही तो समंदर हूँचल हूँ मैं,अचल हूँ मैंकण-कण और पल-पल हूँ मैंद्वार मैं हूँ,भीत मैं हूँहर जन का मीत हूँ मैंसुख है मुझमे, दुःख है मुझमेभवसागर तो मैं ही हूँहां हां मैं अक्षत हूँपार्थ मैं हूँ, बंधू मैं हूँहर लेख और निबंध मैं हूँज्ञान हूँ अज्ञान हूँ,ज्योति मुझमे,ज्वाला मुझमेशीत की लहर हूँ मैंसाम, दाम, दंड, भेद, हूँ मैंहां हां मैं अक्षत हूँमोक्ष मैं हूँ,काम मैं हूँमृत्यु और आकाल मैं हूँशुभ हूँ मैं अशुभ हूँ मैंहर युग का आगाज मैं हूंसिखा है मुझमे, दिशा है मुझमेसुख दुःख का भंडार हूँहां हां मैं अक्षत हूँ
ख्वाइश
सुनता रहू आवाज तेरी, शब्दों को तेरे चुनता रहू
ख्वाइश नही दिल में कोई, बस तुझसे ही मिलता रहू
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
ढूंदु कहा पूछु मैं किस्से
तेरा पता कोई जाने नही
जाऊँ कहा सोचु मैं फिर से
रास्ता कोई मिलता नही
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
सुनता रहू ..................
तेरा निशा, दीखता नही
मेरा जहाँ, सजता नही
मेरा खुदा कुछ चुप सा है
मेरी जमी चलती नही
कहा है तू ................
सपनो में ही..............
सुनता रहू ...................
सचीन निरंजन केजरीवाल
ख्वाइश नही दिल में कोई, बस तुझसे ही मिलता रहू
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
ढूंदु कहा पूछु मैं किस्से
तेरा पता कोई जाने नही
जाऊँ कहा सोचु मैं फिर से
रास्ता कोई मिलता नही
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
सुनता रहू ..................
तेरा निशा, दीखता नही
मेरा जहाँ, सजता नही
मेरा खुदा कुछ चुप सा है
मेरी जमी चलती नही
कहा है तू ................
सपनो में ही..............
सुनता रहू ...................
सचीन निरंजन केजरीवाल
Monday, July 6, 2009
दुनिया से
हम अलग है दुनिया से, इस लिए अकेले है दुनिया में
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैंनेप्यार किया है, तुमसे सुनले ओ मेरी जाना
मैंने दिल दिया है, तुमको न इसको ठुकराना
वरना बन्जाऊंगा मैं एक अफसाना
हो जाऊंगा मैं तो दीवाना
मैंने प्यार......
ऐसा नही ये खेल है, ये तो दिलो का मेल है
इन दो दिलो को तुम मिल जाने को देना
मैंने प्यार....
कभी किसी से कहा नही जो कह रहा हूँ तुमसे
अपना मन है तुमको तुम भी मुझको अपनाना
मैंने प्यार........
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैंने दिल दिया है, तुमको न इसको ठुकराना
वरना बन्जाऊंगा मैं एक अफसाना
हो जाऊंगा मैं तो दीवाना
मैंने प्यार......
ऐसा नही ये खेल है, ये तो दिलो का मेल है
इन दो दिलो को तुम मिल जाने को देना
मैंने प्यार....
कभी किसी से कहा नही जो कह रहा हूँ तुमसे
अपना मन है तुमको तुम भी मुझको अपनाना
मैंने प्यार........
सचीन निरंजन केजरीवाल
Saturday, May 9, 2009
गम के सिवा
कुछ नही है इसके सिवा, देने को कुछ गम के सिवा
जिंदगी भी खाली है, नही है कुछ गम के सिवा
गर रास आए तुमको साथ मेरा
चाहना न कभी किसी को मेरे सिवा
चाहत में तेरी डूबा हर लफ्ज है
यादो में तेरी खोया हर नगम है
कागज पर भी कुछ नही तेरे सिवा
जीवन के हर पल में तुम
मेरे आज कल में तुम
बाकि नही है अब कोई मेरा निशा
कुछ नही .......
अपनी जिंदगी में पहली बार आप के इस लेखक को प्यार हुआ है इससे इश्क हुआ है ये नगम मेरी अपनी उसी प्यार के नाम
आपका सचीन निरंजन केजरीवाल
Sunday, March 1, 2009
ये क्या जी रहे हम
यह क्या जी रहे हम,लगता है यु सनम-२
सांसे है बाकि युही, चल रहे है कदम
यह क्या.......
जो तेरा साथ नही जिंदगी में तो कोई बात नही
सब कुछ है यहाँ हर पल, एक बस हम ही नही
यह क्या जी .....
सब है पर सुना-सुना
दर भी मेरा टुटा-फूटा
यह जीना भी क्या है जीना सनम-२
यह क्या जी रहे हम...
रोते हुए भी हँसता हूँ मैं
पर सब कहते रोता हूँ मैं दर्द कहाँ ले के जाऊँ सनम
ye kya ji rahe ...
sachin
सांसे है बाकि युही, चल रहे है कदम
यह क्या.......
जो तेरा साथ नही जिंदगी में तो कोई बात नही
सब कुछ है यहाँ हर पल, एक बस हम ही नही
यह क्या जी .....
सब है पर सुना-सुना
दर भी मेरा टुटा-फूटा
यह जीना भी क्या है जीना सनम-२
यह क्या जी रहे हम...
रोते हुए भी हँसता हूँ मैं
पर सब कहते रोता हूँ मैं दर्द कहाँ ले के जाऊँ सनम
ye kya ji rahe ...
sachin
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