विचारों के बीज बोता है
और शब्दों की फसल काटता है
मेहनताने में मिलती है मुझे
चंद कहानियां और कुछ कविताएं
और जब कभी सुखा पड़ता है तो
मैं इन्ही कहानियों और कविताओं से
अपना काम चलाता हूं
sachinkejriwal1@gmail.com
अपना काम चलाता हूं
हां वो एक कबीला हैबेढंग से लोग रहते हैंजो सिर्फ गुनहगार हैंहो सकता है कुछ अच्छे भी होंजिनके होने पर भी शक हैयाद है कुछ सालों पहलेकितने कबीले वालों नेकितनी तबाही मचाई थीये पागल घोड़े से हैं बसलगाम कस लो इनकीज़रा नरमदिली से पेश आओफिर देखो कैसे येतुम्हारे घर तुम्हारे शहरतबाह करते दिखेंगेसख्त रहो डटे रहोरहस्य कुछ नहीं है इन कबीलों मेंसब के सब बे पर्दा हैंदुनियां जानती हैसब जानते हैंये दुर्दांत दरिंदे हैंहत्यारे हैं लुटेरे हैंबस यही एक बात है इनमेंजिससे सब खौफ में हैं
मैंने तुमको देखा है,मेरे भोले भगवन
मिलने मुझसे आते हो ख्वाबों में तुम हरदम
तुम अच्छे हो,तुम सच्चे हो
तुमसे है ये जीवन
मुझको बनाया है तुमने,और बनाया जमी ये गगन
मैंने तुमको-----
दिल में हो तुम बसे हुए,मन में हो तुम सजे हुए
हर जगह हो तुमको ही, तुम हो बस हर जगह
मेरे भोले भगवन
मैंने तुमको -----
कभी-कभी तुम रूठ जाते हो मुझसे
अभी भी तो तुम रूठे हो मुझसे, मान भी जाओ,अब जिद छोड़ो -२
मेरे प्यारे भगवन
मैंने तुमको---
दुःख में और चिंता में साथ रहो तुम हरदम
इतनी कृपा करो हमपे रहे हर तरफ़ खुशियो का मौसम
मैंने तुमको देखा है .........
सचीन निरंजन केजरीवाल---