यह क्या जी रहे हम,लगता है यु सनम-२
सांसे है बाकि युही, चल रहे है कदम
यह क्या.......
जो तेरा साथ नही जिंदगी में तो कोई बात नही
सब कुछ है यहाँ हर पल, एक बस हम ही नही
यह क्या जी .....
सब है पर सुना-सुना
दर भी मेरा टुटा-फूटा
यह जीना भी क्या है जीना सनम-२
यह क्या जी रहे हम...
रोते हुए भी हँसता हूँ मैं
पर सब कहते रोता हूँ मैं दर्द कहाँ ले के जाऊँ सनम
ye kya ji rahe ...
sachin
Sunday, March 1, 2009
Monday, February 16, 2009
लव डे
हुस्न वालों की रात है आज
दिलवालों की बात है आज
हम तोह है पत्थर दिल, हमारी क्या औकात है आज
कहाँ फसा रहे हो हमे हुस्न वालों के झमेलों में
हम तो फेस है, गुर्वातों के मेलों में
सचीन
दिलवालों की बात है आज
हम तोह है पत्थर दिल, हमारी क्या औकात है आज
कहाँ फसा रहे हो हमे हुस्न वालों के झमेलों में
हम तो फेस है, गुर्वातों के मेलों में
सचीन
Tuesday, December 9, 2008
Sunday, July 27, 2008
जज्बा जिगर का
जज्बा जिगर का लो उनसे
सुन लो तुम ऐ नोजवानो
गाथा अपने देश की, लाखों उन शहीदों की
है यहाँ पे बन के हिम्मत, देखलो तुम आज भी
हमे है गर्व,हमे है नाज
हम उनकी संतान है
देश की खातिर हमको भी,अब देनी और लेनी कुछ जान है
वीरगती या विजय नारा था जिनका
वो ही अब हमारा है
न कभी था दुश्मन का, न कभी ये होगा
ये तिरंगा प्यरा देखलो हमारा है
आएगा जो भी लेने इसको आगे
वो दुश्मन हमारा है
सिचा था पहले भी लहू से
एक बार वो सब और सही
ये देश तो हमारा है
तिरंगा प्यरा हमारा है
जज्बा जिगर .....
सचीन
सुन लो तुम ऐ नोजवानो
गाथा अपने देश की, लाखों उन शहीदों की
है यहाँ पे बन के हिम्मत, देखलो तुम आज भी
हमे है गर्व,हमे है नाज
हम उनकी संतान है
देश की खातिर हमको भी,अब देनी और लेनी कुछ जान है
वीरगती या विजय नारा था जिनका
वो ही अब हमारा है
न कभी था दुश्मन का, न कभी ये होगा
ये तिरंगा प्यरा देखलो हमारा है
आएगा जो भी लेने इसको आगे
वो दुश्मन हमारा है
सिचा था पहले भी लहू से
एक बार वो सब और सही
ये देश तो हमारा है
तिरंगा प्यरा हमारा है
जज्बा जिगर .....
सचीन
देश के शहीद प्रणाम
हर साल सलामी देते है,
हर दिन सर को झुकाते है,
हर पल याद उन्हें हम करते है,
जो देश पे कुर्बा होते है,
हम हिम्मत उनसे लेते है,
हम जज्बा उनसे लेते है,
आज़ादी जिसने दी हमको
दुश्मन से हमारे लड़े जो
भगत सिंघ,मंगल और गाँधी, उनको ही हम कहते है
जो लाज बचाए माँ की अपनी
बेटा वो ही कहलाता है
अपने देश पे हर बेटा
हस्ते-हस्ते कुर्बान हो जाता है
जो देश के दुश्मन को खदेरे
हम ताक़त उस्को कहते है
है धन्य हर वो माँ, जिस कोख
से ये वीर जनम लेते है
हर साल सलामी ....
हर दिन सर .......
सचीन
हर दिन सर को झुकाते है,
हर पल याद उन्हें हम करते है,
जो देश पे कुर्बा होते है,
हम हिम्मत उनसे लेते है,
हम जज्बा उनसे लेते है,
आज़ादी जिसने दी हमको
दुश्मन से हमारे लड़े जो
भगत सिंघ,मंगल और गाँधी, उनको ही हम कहते है
जो लाज बचाए माँ की अपनी
बेटा वो ही कहलाता है
अपने देश पे हर बेटा
हस्ते-हस्ते कुर्बान हो जाता है
जो देश के दुश्मन को खदेरे
हम ताक़त उस्को कहते है
है धन्य हर वो माँ, जिस कोख
से ये वीर जनम लेते है
हर साल सलामी ....
हर दिन सर .......
सचीन
Thursday, July 3, 2008
कहाँ हूँ -२
कहाँ हूँ-६
मैं खो गया हूँ, तेरा हो गया हूँ
अब क्या कहूँ, मैं कहाँ हूँ -२
कहाँ हूँ-६
सूरत पे तेरी मैं मर मिटा हूँ
जुल्फों में तेरी मैं खो गया हूँ
कहाँ हूँ-६
आँखे है तेरी,कारी मतवारी
सुरतिया लगे है अब हमका प्यारी
कैसे कहूँ की अब हम नही हूं
नसे में तेरी मैं डूबा हुआ हूँ
कहाँ हूँ-6
सचीन
मैं खो गया हूँ, तेरा हो गया हूँ
अब क्या कहूँ, मैं कहाँ हूँ -२
कहाँ हूँ-६
सूरत पे तेरी मैं मर मिटा हूँ
जुल्फों में तेरी मैं खो गया हूँ
कहाँ हूँ-६
आँखे है तेरी,कारी मतवारी
सुरतिया लगे है अब हमका प्यारी
कैसे कहूँ की अब हम नही हूं
नसे में तेरी मैं डूबा हुआ हूँ
कहाँ हूँ-6
सचीन
Tuesday, July 1, 2008
तेरे रंग में
तेरे ही रंग में,रंग गया मैं
तेरा ही हो के,रह गया मैं-२
देखा तुझको खो गया मैं-२
देखते ही तेरा हो गया मैं
तेरे रंग.......
बिन तेरे सब बेकार है,
यह दुनिया भी बेजार है
कैसे कहूँ मैं, हाँ कैसे कहूँ
मुझको हो गया प्यार है
तेरे ही रंग................
तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन की, खुशबू
हो तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन ....
घुल गया-२ मैं
तेरा ही हो के रह गया मैं
तेरे ही ....
जब से मिले हो तुम मुझको जाना,
ख़ुद को ही न पहचाना
हाय ये कशिश,हाय ये अदा -२
हो गया इनपे मैं फ़िदा
अब क्या करू,-२ मैं कुछ तो बता
लूटा तुने मुझे जाने वफ़ा
तेरे.................
सचीन
तेरा ही हो के,रह गया मैं-२
देखा तुझको खो गया मैं-२
देखते ही तेरा हो गया मैं
तेरे रंग.......
बिन तेरे सब बेकार है,
यह दुनिया भी बेजार है
कैसे कहूँ मैं, हाँ कैसे कहूँ
मुझको हो गया प्यार है
तेरे ही रंग................
तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन की, खुशबू
हो तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन ....
घुल गया-२ मैं
तेरा ही हो के रह गया मैं
तेरे ही ....
जब से मिले हो तुम मुझको जाना,
ख़ुद को ही न पहचाना
हाय ये कशिश,हाय ये अदा -२
हो गया इनपे मैं फ़िदा
अब क्या करू,-२ मैं कुछ तो बता
लूटा तुने मुझे जाने वफ़ा
तेरे.................
सचीन
Sunday, June 22, 2008
बाकि है अभी
आशा की किरने बाकि है अभी
उषा की बूंदे बाकि है अभी
निर्मोही संसार में,
कुछ दिन बाकि है अभी
नास्वर शरीर में चंद सांसे बाकि है अभी
लक्ष्य को पाने की चाहत, में चलना है अभी
जो दूर तो है पर ज्यादा दूर नही
देर से ही सही, पर उसे पाना है अभी
दूर तक चलना पड़े तो चलना है अभी
आशा की .............
सितारों की बिच में चाँद को चमकना है अभी
सितम है चांदनी पे अंधेरों का अभी
सितम की ये काली रात ...........है अभी
चमकता चाँद निकलना है अभी
सचीन
उषा की बूंदे बाकि है अभी
निर्मोही संसार में,
कुछ दिन बाकि है अभी
नास्वर शरीर में चंद सांसे बाकि है अभी
लक्ष्य को पाने की चाहत, में चलना है अभी
जो दूर तो है पर ज्यादा दूर नही
देर से ही सही, पर उसे पाना है अभी
दूर तक चलना पड़े तो चलना है अभी
आशा की .............
सितारों की बिच में चाँद को चमकना है अभी
सितम है चांदनी पे अंधेरों का अभी
सितम की ये काली रात ...........है अभी
चमकता चाँद निकलना है अभी
सचीन
मेरा मकान
मैं दुखी हूँ, उन सभी बातों से
जो मैंने कभी की थी किसी से
या फिर किसी दुसरे ने की थी
कभी कुछ बातें मुझसे
मैं खफा हूँ उनसे जो जन्वारोंको
जानवरों से लडाते है
मगर उनसे ज्यादा दुखी हूँ,मैं उनसे हूँ
जो ख़ुद तो लड़ते है
औरों को भी जानवर की तरह लड़ने को मजबूर कर देते है
मैं दुखी हूँ उन तमाम चीजों से
जो कभी दुनिया में देखि थी
मैंने और अफ़सोस
की अब भी उन्ही चीजों को
देख रहा हूँ, इस धरा पर
शिर्फ़ एक अन्तर के साथ
सभी चीजे पहले से ज्यादा
दुसित हो गई है
फिर भी हमे संतोष नही
और विस भर रहे है हम
मैं ........
सचीन
जो मैंने कभी की थी किसी से
या फिर किसी दुसरे ने की थी
कभी कुछ बातें मुझसे
मैं खफा हूँ उनसे जो जन्वारोंको
जानवरों से लडाते है
मगर उनसे ज्यादा दुखी हूँ,मैं उनसे हूँ
जो ख़ुद तो लड़ते है
औरों को भी जानवर की तरह लड़ने को मजबूर कर देते है
मैं दुखी हूँ उन तमाम चीजों से
जो कभी दुनिया में देखि थी
मैंने और अफ़सोस
की अब भी उन्ही चीजों को
देख रहा हूँ, इस धरा पर
शिर्फ़ एक अन्तर के साथ
सभी चीजे पहले से ज्यादा
दुसित हो गई है
फिर भी हमे संतोष नही
और विस भर रहे है हम
मैं ........
सचीन
कल के लिए
रख दिया है मैंने दिल,
कल के लिए
मेरी जा को रख दिया है
तेरे लिए
इंतजार तेरा है मेरा प्यार तेरा है
मेरा प्यार तेरा है -२
रख दिया है प्यार को यार के लिए
रख दिया है ..........
तड़प रहा था,मेरा दिल तेरे लिए,
भटक रहा था, रात में तेरे लिए
दूंदता फिरे ये कहाँ तुमको,
न पूछो यार रहने दो ये भी कल के लिए
रख दिया ....
मेल में,रेल में,
बस में ,कार में,
हर जगह बेकार में,यु ही तेरे प्यार में
भटक रहा था मेरा दिल-२
जाने ये कब से
रख दिया ....
सचीन
कल के लिए
मेरी जा को रख दिया है
तेरे लिए
इंतजार तेरा है मेरा प्यार तेरा है
मेरा प्यार तेरा है -२
रख दिया है प्यार को यार के लिए
रख दिया है ..........
तड़प रहा था,मेरा दिल तेरे लिए,
भटक रहा था, रात में तेरे लिए
दूंदता फिरे ये कहाँ तुमको,
न पूछो यार रहने दो ये भी कल के लिए
रख दिया ....
मेल में,रेल में,
बस में ,कार में,
हर जगह बेकार में,यु ही तेरे प्यार में
भटक रहा था मेरा दिल-२
जाने ये कब से
रख दिया ....
सचीन
Friday, June 20, 2008
तेरा साया
कुछ देर,कुछ दूर,
तेरा साया साथ चलेगा क्या -२
जल रहा हूँ मैं तो कबसे -२
आग में हा इस आग में
मुझे ठंडक देगा क्या तेरा साया
कुछ देर -२
यादों में तेरी, भटक रहा हूँ
बिन तेरे दिलबर जी रहा हूँ
ये न पूछो जी जिंदगी क्या
मोम की तरह पिघल रहा हूँ
मेरे साथ ढलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
कुछ देर ...
सचीन
तेरा साया साथ चलेगा क्या -२
जल रहा हूँ मैं तो कबसे -२
आग में हा इस आग में
मुझे ठंडक देगा क्या तेरा साया
कुछ देर -२
यादों में तेरी, भटक रहा हूँ
बिन तेरे दिलबर जी रहा हूँ
ये न पूछो जी जिंदगी क्या
मोम की तरह पिघल रहा हूँ
मेरे साथ ढलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
तेरा साया साथ चलेगा क्या
कुछ देर ...
सचीन
Thursday, June 19, 2008
क्या ऐसा ही ये प्यार है?
बिन तुझे याद किए
आँख मेरी लगती नही
बिन तेरे ख्याल के
मेरी सुबह होती नही
क्या करू मैं गर
मुझे तुमसे जो प्यार है
क्या करू मैं गर
तुमसे जो इक्र्रार है
बिन तुझे -२
ऐसा क्यों होता है मैंने सोचा नही
सुना था पहले पर जाना नही
क्या ऐसा ही ये प्यार है
बिन तुझे -२
सचीन
आँख मेरी लगती नही
बिन तेरे ख्याल के
मेरी सुबह होती नही
क्या करू मैं गर
मुझे तुमसे जो प्यार है
क्या करू मैं गर
तुमसे जो इक्र्रार है
बिन तुझे -२
ऐसा क्यों होता है मैंने सोचा नही
सुना था पहले पर जाना नही
क्या ऐसा ही ये प्यार है
बिन तुझे -२
सचीन
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