Thursday, August 20, 2009

गजल

हम न आए दिल में तेरे 
और न ख्याल ही आया 
हमारे दिल में तुम जो हो 
इस बात पे भी गुमां न आया 
तुम न आए मेरे जहाँ में
हम तुम्हारे हो गए 
हमारी दुनिया सुनी सही 
जो तुम्हारी दुनिया है सजी हुई 
बर्बाद हसरत है अपने दिल की 
जो तुम न आए तो कुछ नही 
दोस्त-दोस्त कहते-कहते 
भूल गए कब ख़बर नही 
हम न भूले न भूलेंगे तुमको 
कह रहे सच झूठ नही 
संग तुम्हारे है एक दुनिया 
साथ मेरे कोई नही 
चलता हूँ साये संग तेरे 
मेरा साया कहीं नही 
सोचते हो सब देखता हूँ 
पर इन नजरों में अब कोई नही 
पता है हमको हो दूर तुम हमसे 
आश भी मेरे नजदीक नही 
हम न आए दिल में तेरे और न------ 

तंगहाल जिंदगी

पता नही क्या हुआ आज कल 
पहली बार अपनी तंगहाल जिंदगी में 
कुछ कमी सी खल रही है 
सजा भुगत रहा हूँ मैं उसकी 
जो गलती मैंने की है 
अपनी तंगहाल जिंदगी में 
कुछ कमी सी खल रही है
गुनाहगार हूँ मैं ख़ुद का 
पता नही कब कर दिया गुनाह मैंने 
सोचा नही था कभी जो कर दिया मैंने 
सब कुछ था मेरे पास 
अब कुछ नही है मेरे पास 
ऐसा क्या कर दिया मैंने 
होटों से हंसी, 
आँखों से पानी 
भी तो खो दिया मैंने 
मैं किसी का कोई नही 
है कोई जिसको हमपे यकीं नही 
ऐसा क्या कर दिया मैंने 
पर पहली बार 
अपनी तंगहाल जिंदगी में 
कुछ कमी सी खल रही है 

बिद्या की देवी

हम कैसे छोड़ दे सरस्वती को, 
जो कम-से-कम तो मेरी है 
लक्ष्मी का है क्या भरोसा, 
आज तेरी कल मेरी है 
हम कैसे------ 
कृपावान है मुझपे ये बिद्या की देवी 
कैसे किनारा कर ले हम, ये जो मेरी है 
हम कैसे छोड़ ------ 
हूँ मैं गंवार अनपढ़ सा 
फ़िर भी मुझपे दयावान है 
ये सरस्वती तो मेरी है 
हम कैसे छोड़------ 
लक्ष्मी है चंचल रूकती नही है 
आज इधर तो कल उधर रहती है 
सरस्वती तो संग सदा मेरे ही चलती है 
फ़िर छोड़ दूं मैं कैसे नाता तोड़ दूं मैंं कैसे 
सब कहते हैं छोड़ दो अपनी कलम को तोड़ दो 
कहाँ जाऊंगा कर मैं ये, 
घट सरस्वती का दुख्ला के 
माफ़ न कर पायेगी मुझको, 
ये सरस्वती जो मेरी है 
हम कैसे --------

दीवाना

मैं दीवाना होने लगा हूँ, याद में तेरी जलने लगा हूँ
मैं क्या करू मैं प्यार में हूँ-४
आग नही अब मुझको जलाती है,
याद तेरी जब मुझको सताती है
बारिश नही अब मुझको भिंगोती है
आंसू मेरे अब मुझको भिन्गोते है
मैं क्या करू
मैं-४
तन्हाई मुझको अब डसती नही है
रुसवाई मुझको अब खलती नही है
आदत है जबसे जीने में ऐसे,
कुछ भी नही है सिने में तब से
अब क्या करू, मैं क्या कहू
मैं प्यार में हूँ -४
मैं प्यार में हूँ, हाँ मैं प्यार में हूँ
तेरे प्यार में हूँ, मैं प्यार में हूँ
सचीन निरंजन केजरीवाल

Wednesday, July 8, 2009

अक्षत

अक्षत हूँ मैं क्षत कभी होता नहीं 
मैं धरा हूँ,मैं गगन हूँ 
भूतल में भी मैं ही हूँ 
ब्रह्म मैं हूँ, बिष्णु मैं हूँ 
हर जन का स्वामी हूँ मैं 
टिके नही सामने दुश्मन कोई 
करे जो क्षत मुझे ऐसा नही कोई 
कृष्ण मुझमे, राम मैं हूँ 
हां हां मैं अक्षत हूँ 
रवि है मुझमे, शनि है 
मुझमे हर एक का स्वरुप हूँ 
विपदा में मैं साथी हूँ, 
संघर्ष में विकराल हूँ 
मान्यवर हूँ न नश्वर हूँ 
क्यों की मैं अक्षत हूँ 
मैं अग्नि हूँ,मैं हवा हूँ 
मैं ही तो समंदर हूँ 
चल हूँ मैं,अचल हूँ मैं 
कण-कण और पल-पल हूँ मैं 
द्वार मैं हूँ,भीत मैं हूँ 
हर जन का मीत हूँ मैं 
सुख है मुझमे, दुःख है मुझमे 
भवसागर तो मैं ही हूँ 
हां हां मैं अक्षत हूँ 
पार्थ मैं हूँ, बंधू मैं हूँ 
हर लेख और निबंध मैं हूँ 
ज्ञान हूँ अज्ञान हूँ,

दीप और अंधकार हूँ 
ज्योति मुझमे,ज्वाला मुझमे 
शीत की लहर हूँ मैं 
साम, दाम, दंड, भेद, हूँ मैं 
हां हां मैं अक्षत हूँ 
मोक्ष मैं हूँ,काम मैं हूँ 
मृत्यु और आकाल मैं हूँ 
शुभ हूँ मैं अशुभ हूँ मैं 
हर युग का आगाज मैं हूं 
सिखा है मुझमे, दिशा है मुझमे 
सुख दुःख का भंडार हूँ 
हां हां मैं अक्षत हूँ 

ख्वाइश

सुनता रहू आवाज तेरी, शब्दों को तेरे चुनता रहू
ख्वाइश नही दिल में कोई, बस तुझसे ही मिलता रहू
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
ढूंदु कहा पूछु मैं किस्से
तेरा पता कोई जाने नही
जाऊँ कहा सोचु मैं फिर से
रास्ता कोई मिलता नही
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
सुनता रहू ..................
तेरा निशा, दीखता नही
मेरा जहाँ, सजता नही
मेरा खुदा कुछ चुप सा है
मेरी जमी चलती नही
कहा है तू ................
सपनो में ही..............
सुनता रहू ...................
सचीन निरंजन केजरीवाल

Monday, July 6, 2009

दुनिया से

हम अलग है दुनिया से, इस लिए अकेले है दुनिया में
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैंनेप्यार किया है, तुमसे सुनले ओ मेरी जाना
मैंने दिल दिया है, तुमको न इसको ठुकराना
वरना बन्जाऊंगा मैं एक अफसाना
हो जाऊंगा मैं तो दीवाना
मैंने प्यार......
ऐसा नही ये खेल है, ये तो दिलो का मेल है
इन दो दिलो को तुम मिल जाने को देना
मैंने प्यार....
कभी किसी से कहा नही जो कह रहा हूँ तुमसे
अपना मन है तुमको तुम भी मुझको अपनाना
मैंने प्यार........
सचीन निरंजन केजरीवाल

Saturday, May 9, 2009

गम के सिवा

कुछ नही है इसके सिवा, देने को कुछ गम के सिवा

जिंदगी भी खाली है, नही है कुछ गम के सिवा

गर रास आए तुमको साथ मेरा

चाहना न कभी किसी को मेरे सिवा

चाहत में तेरी डूबा हर लफ्ज है

यादो में तेरी खोया हर नगम है

कागज पर भी कुछ नही तेरे सिवा

जीवन के हर पल में तुम

मेरे आज कल में तुम

बाकि नही है अब कोई मेरा निशा

कुछ नही .......

अपनी जिंदगी में पहली बार आप के इस लेखक को प्यार हुआ है इससे इश्क हुआ है ये नगम मेरी अपनी उसी प्यार के नाम

आपका सचीन निरंजन केजरीवाल

Sunday, March 1, 2009

ये क्या जी रहे हम

यह क्या जी रहे हम,लगता है यु सनम-२
सांसे है बाकि युही, चल रहे है कदम
यह क्या.......
जो तेरा साथ नही जिंदगी में तो कोई बात नही
सब कुछ है यहाँ हर पल, एक बस हम ही नही
यह क्या जी .....
सब है पर सुना-सुना
दर भी मेरा टुटा-फूटा
यह जीना भी क्या है जीना सनम-२
यह क्या जी रहे हम...
रोते हुए भी हँसता हूँ मैं
पर सब कहते रोता हूँ मैं दर्द कहाँ ले के जाऊँ सनम
ye kya ji rahe ...
sachin

Monday, February 16, 2009

लव डे

हुस्न वालों की रात है आज
दिलवालों की बात है आज
हम तोह है पत्थर दिल, हमारी क्या औकात है आज
कहाँ फसा रहे हो हमे हुस्न वालों के झमेलों में
हम तो फेस है, गुर्वातों के मेलों में
सचीन

Tuesday, December 9, 2008

माफ़ी चाहता हूँ मैं काफी दिनों से आपसब को समय नही दे पा रहा हूँ, दरअसल इधर कुछ दिनों से मेरी जिंदगी कुछ हंगामेखेज बीत रही है इस लिए कुछ समय की तंगी है, जल्द ही कुछ खास के साथ मिलने का वादा करते हुए आपसब से बिदा लेता हूँ,
सचीन