Wednesday, July 8, 2009

अक्षत

अक्षत हूँ मैं क्षत कभी होता नहीं 
मैं धरा हूँ,मैं गगन हूँ 
भूतल में भी मैं ही हूँ 
ब्रह्म मैं हूँ, बिष्णु मैं हूँ 
हर जन का स्वामी हूँ मैं 
टिके नही सामने दुश्मन कोई 
करे जो क्षत मुझे ऐसा नही कोई 
कृष्ण मुझमे, राम मैं हूँ 
हां हां मैं अक्षत हूँ 
रवि है मुझमे, शनि है 
मुझमे हर एक का स्वरुप हूँ 
विपदा में मैं साथी हूँ, 
संघर्ष में विकराल हूँ 
मान्यवर हूँ न नश्वर हूँ 
क्यों की मैं अक्षत हूँ 
मैं अग्नि हूँ,मैं हवा हूँ 
मैं ही तो समंदर हूँ 
चल हूँ मैं,अचल हूँ मैं 
कण-कण और पल-पल हूँ मैं 
द्वार मैं हूँ,भीत मैं हूँ 
हर जन का मीत हूँ मैं 
सुख है मुझमे, दुःख है मुझमे 
भवसागर तो मैं ही हूँ 
हां हां मैं अक्षत हूँ 
पार्थ मैं हूँ, बंधू मैं हूँ 
हर लेख और निबंध मैं हूँ 
ज्ञान हूँ अज्ञान हूँ,

दीप और अंधकार हूँ 
ज्योति मुझमे,ज्वाला मुझमे 
शीत की लहर हूँ मैं 
साम, दाम, दंड, भेद, हूँ मैं 
हां हां मैं अक्षत हूँ 
मोक्ष मैं हूँ,काम मैं हूँ 
मृत्यु और आकाल मैं हूँ 
शुभ हूँ मैं अशुभ हूँ मैं 
हर युग का आगाज मैं हूं 
सिखा है मुझमे, दिशा है मुझमे 
सुख दुःख का भंडार हूँ 
हां हां मैं अक्षत हूँ 

ख्वाइश

सुनता रहू आवाज तेरी, शब्दों को तेरे चुनता रहू
ख्वाइश नही दिल में कोई, बस तुझसे ही मिलता रहू
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
ढूंदु कहा पूछु मैं किस्से
तेरा पता कोई जाने नही
जाऊँ कहा सोचु मैं फिर से
रास्ता कोई मिलता नही
कहाँ है तू दिख जा जरा
सपनो में ही सही मिल जा जरा
सुनता रहू ..................
तेरा निशा, दीखता नही
मेरा जहाँ, सजता नही
मेरा खुदा कुछ चुप सा है
मेरी जमी चलती नही
कहा है तू ................
सपनो में ही..............
सुनता रहू ...................
सचीन निरंजन केजरीवाल

Monday, July 6, 2009

दुनिया से

हम अलग है दुनिया से, इस लिए अकेले है दुनिया में
किसी के पीछे नही है हम
पीछे "हमरी' है दुनिया
देख लो मुर के एक बार दिख जाएगा कारवां
चला आ रहा है देखो कैसे
जहाँ मेरे पीछे-पीछे
क्या लगता है तुमको
क्या लगता है औरों को
क्या करना है जानकर
लोगों को पहचान कर
देखि हमने दुनियाँ सारी
देखे सारे मंजर, पता चल गया है हमको
नही है कुछ भी इस्के अंदर
खोकली है ये दुनिया, एक ओखली सी है ये दुनिया
जो डाले सर अपना इस्मे नही सलामत है वो सर
क्या करना है हम को इस दुनिया को ......... कर
हम अलग............
सचीन निरंजन केजरीवाल
मैंनेप्यार किया है, तुमसे सुनले ओ मेरी जाना
मैंने दिल दिया है, तुमको न इसको ठुकराना
वरना बन्जाऊंगा मैं एक अफसाना
हो जाऊंगा मैं तो दीवाना
मैंने प्यार......
ऐसा नही ये खेल है, ये तो दिलो का मेल है
इन दो दिलो को तुम मिल जाने को देना
मैंने प्यार....
कभी किसी से कहा नही जो कह रहा हूँ तुमसे
अपना मन है तुमको तुम भी मुझको अपनाना
मैंने प्यार........
सचीन निरंजन केजरीवाल

Saturday, May 9, 2009

गम के सिवा

कुछ नही है इसके सिवा, देने को कुछ गम के सिवा

जिंदगी भी खाली है, नही है कुछ गम के सिवा

गर रास आए तुमको साथ मेरा

चाहना न कभी किसी को मेरे सिवा

चाहत में तेरी डूबा हर लफ्ज है

यादो में तेरी खोया हर नगम है

कागज पर भी कुछ नही तेरे सिवा

जीवन के हर पल में तुम

मेरे आज कल में तुम

बाकि नही है अब कोई मेरा निशा

कुछ नही .......

अपनी जिंदगी में पहली बार आप के इस लेखक को प्यार हुआ है इससे इश्क हुआ है ये नगम मेरी अपनी उसी प्यार के नाम

आपका सचीन निरंजन केजरीवाल

Sunday, March 1, 2009

ये क्या जी रहे हम

यह क्या जी रहे हम,लगता है यु सनम-२
सांसे है बाकि युही, चल रहे है कदम
यह क्या.......
जो तेरा साथ नही जिंदगी में तो कोई बात नही
सब कुछ है यहाँ हर पल, एक बस हम ही नही
यह क्या जी .....
सब है पर सुना-सुना
दर भी मेरा टुटा-फूटा
यह जीना भी क्या है जीना सनम-२
यह क्या जी रहे हम...
रोते हुए भी हँसता हूँ मैं
पर सब कहते रोता हूँ मैं दर्द कहाँ ले के जाऊँ सनम
ye kya ji rahe ...
sachin

Monday, February 16, 2009

लव डे

हुस्न वालों की रात है आज
दिलवालों की बात है आज
हम तोह है पत्थर दिल, हमारी क्या औकात है आज
कहाँ फसा रहे हो हमे हुस्न वालों के झमेलों में
हम तो फेस है, गुर्वातों के मेलों में
सचीन

Tuesday, December 9, 2008

माफ़ी चाहता हूँ मैं काफी दिनों से आपसब को समय नही दे पा रहा हूँ, दरअसल इधर कुछ दिनों से मेरी जिंदगी कुछ हंगामेखेज बीत रही है इस लिए कुछ समय की तंगी है, जल्द ही कुछ खास के साथ मिलने का वादा करते हुए आपसब से बिदा लेता हूँ,
सचीन

Sunday, July 27, 2008

जज्बा जिगर का

जज्बा जिगर का लो उनसे
सुन लो तुम ऐ नोजवानो
गाथा अपने देश की, लाखों उन शहीदों की
है यहाँ पे बन के हिम्मत, देखलो तुम आज भी
हमे है गर्व,हमे है नाज
हम उनकी संतान है
देश की खातिर हमको भी,अब देनी और लेनी कुछ जान है
वीरगती या विजय नारा था जिनका
वो ही अब हमारा है
न कभी था दुश्मन का, न कभी ये होगा
ये तिरंगा प्यरा देखलो हमारा है
आएगा जो भी लेने इसको आगे
वो दुश्मन हमारा है
सिचा था पहले भी लहू से
एक बार वो सब और सही
ये देश तो हमारा है
तिरंगा प्यरा हमारा है
जज्बा जिगर .....
सचीन

देश के शहीद प्रणाम

हर साल सलामी देते है,
हर दिन सर को झुकाते है,
हर पल याद उन्हें हम करते है,
जो देश पे कुर्बा होते है,
हम हिम्मत उनसे लेते है,
हम जज्बा उनसे लेते है,
आज़ादी जिसने दी हमको
दुश्मन से हमारे लड़े जो
भगत सिंघ,मंगल और गाँधी, उनको ही हम कहते है
जो लाज बचाए माँ की अपनी
बेटा वो ही कहलाता है
अपने देश पे हर बेटा

हस्ते-हस्ते कुर्बान हो जाता है
जो देश के दुश्मन को खदेरे
हम ताक़त उस्को कहते है
है धन्य हर वो माँ, जिस कोख
से ये वीर जनम लेते है
हर साल सलामी ....
हर दिन सर .......

सचीन



Thursday, July 3, 2008

कहाँ हूँ -२

कहाँ हूँ-६
मैं खो गया हूँ, तेरा हो गया हूँ
अब क्या कहूँ, मैं कहाँ हूँ -२
कहाँ हूँ-६
सूरत पे तेरी मैं मर मिटा हूँ
जुल्फों में तेरी मैं खो गया हूँ
कहाँ हूँ-
आँखे है तेरी,कारी मतवारी
सुरतिया लगे है अब हमका प्यारी
कैसे कहूँ की अब हम नही हूं
नसे में तेरी मैं डूबा हुआ हूँ
कहाँ हूँ-6
सचीन

Tuesday, July 1, 2008

तेरे रंग में

तेरे ही रंग में,रंग गया मैं
तेरा ही हो के,रह गया मैं-२
देखा तुझको खो गया मैं-२
देखते ही तेरा हो गया मैं
तेरे रंग.......
बिन तेरे सब बेकार है,
यह दुनिया भी बेजार है
कैसे कहूँ मैं, हाँ कैसे कहूँ
मुझको हो गया प्यार है
तेरे ही रंग................
तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन की, खुशबू
हो तेरे रंग के जादू में
तेरे बदन ....
घुल गया-२ मैं
तेरा ही हो के रह गया मैं
तेरे ही ....
जब से मिले हो तुम मुझको जाना,
ख़ुद को ही न पहचाना
हाय ये कशिश,हाय ये अदा -२
हो गया इनपे मैं फ़िदा
अब क्या करू,-२ मैं कुछ तो बता
लूटा तुने मुझे जाने वफ़ा
तेरे.................
सचीन