Sunday, January 14, 2024

प्रह्लाद

 बनो प्रह्लाद और
परित्याग करो
जो राम के बैरी हैं
मत भूलो राम के खातिर
कितनों पे चली यहां गोली है 

तहज़ीब

 वालिदैन भी मिले 
तकरीरें भी मिली
तहज़ीब मगर तुमको
फिर भी न मिली

मेरे ज़ख्म

 मेरे ज़ख्म देखने न सही
मुझे तो देखने चले आते

Saturday, January 13, 2024

एक गम है

 तुम चले गये हो मुझे पता है
एक गम है
तुम नहीं आओगे मुझे पता है
एक गम है
जाना था चले जाते
जाते जाते कह जाते
बिन कहे गये हो 
एक गम है
राह निकलती कहाँ है कोई
अब के मैं गम से निकलु
ये भी एक गम है
एक प्यार ही तो माँगा था तुम्हारा 
प्यार से दुतकार कर देते
जिंदगी नरक तो रहती
तुम प्यार से याद आते
अब भी प्यार करता हूँ
गर न किया तो
ये नरक कैसे भूगतुंगा
जो तुमने दिया है
पर तुम कब मानते हो ये
तुमने दिया है 
ये भी एक गम है

न इश्क़ है, न वस्ल है, न हिज्र है..!

 जो जिसका हमदम है, वो एक दूजे के साथ है..!
मेरा कोई हमदम नहीं, कहाँ कोई मेरा संग है..!!
जो रंगे हुए हैं चेहरे सबके, वो प्यार का रंग है..!
कहाँ प्यार करता है कोई मुझसे..??
कहाँ जीवन में मेरे कोई रंग है..??
सबके हाथों में एक हाथ है,
मेरी अलग पहचान है..!
खामोशी से रिश्ता मेरा, अँधेरा मेहमान है..!!
तन्हाई, बचैनी, उनके दो बच्चे,
आ के जीवन में मेरे बस गए हैं,
बाकी सबको पता है,
यहाँ इक बे'नाम शायर रहता है,
जिसके पास कुछ नहीं,
ना संग हमदम है ना प्यार है..!
तन्हाई से रिश्ता जिसका,
अँधेरा, खामोशी, बैचैनी जिनके मेहमान हैं..!
न इश्क़ है, न वस्ल है, न हिज्र है..!

तंगहाल जिंदगी

 पता नही क्या हुआ आज कल
पहली बार अपनी तंगहाल जिंदगी में
कुछ कमी सी खल रही है
सजा भुगत रहा हूँ मैं उसकी
जो गलती मैंने की है
अपनी तंगहाल जिंदगी में है
कुछ कमी सी खल रही 
गुनाहगार हूँ मैं ख़ुद का
पता नही कब कर दिया गुनाह मैंने
सोचा नही था कभी
जो कर दिया मैंने
सब कुछ था मेरे पास
अब कुछ नही है मेरे पास
ऐसा क्या कर दिया मैंने
होठो से हसी, आँखों से पानी
भी तो खो दिया मैंने
मैं किसी का कोई नही
है कोई जिसको हमपे यकीं नही
ऐसा क्या कर दिया मैंने
पहली बार अपनी तंगहाल जिंदगी में 
कुछ 
कमी सी खल रही है..!

मेरे शब्दों से दुनिया

 काश बदल जाती मेरे शब्दों से दुनिया
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनिया
खा लेता चांद समझ रोटी मैं तुझे
गर मां थाली में पड़ोस देती न दुनिया
तमाशे बड़े देखता हूं जहां में
नजारें भी गजब दिखती है दुनिया
हरारतें अपनी मिटा लेने के बाद
नामुराद समझ ही लेती है दुनिया
नाराज गर हो जाए सब अपने
तो दिलशाद हो जाती है दुनियां
काश के बदल जाती मेरे शब्दों से दुनिया
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनिया

जाने कैसे जीतें लोग

 लूट कर सब कुछ खुशियां मनाते
देखे हमने कितने लोग
दुनिया जिनको कहती है
भोले भाले प्यारे लोग
भोले बैठे मंदिर में
हमने देखा
भाले चुभोते लोग
जान के सब यहां दुश्मन हैं
बस भाई भाई कहते लोग
उजाड़ कर दुनिया सारी
पैगाम मुहब्बत के देते लोग
सब के सब हैं नामुराद
जाने कैसे जीतें लोग
फिक्र न करो तुम सब
मारे तुम भी जाओगे
वक्त करेगा कत्ल तुम्हारा
तुम देखना एक रोज

ये सांसों की दलदल

 ये सांसों का दलदल
ये जीवन की खुशबू
फिर मौत का तांडव
रातों को जगना
सितारों को तकना
आंखों की चिलमन का हौले से गिरना
गिरते ही जाना कभी न सम्हलना
खुराफाती दुनिया, नासाज सारे
बस बजते ही जाते, बेसुरे सारे
होली के रंगों सा सस्ता जमीर
दिवाली की रौनक में बिकता जमीर
ये पैसों की खन खन
वो रोटी की तड़पन
चांद को ताकते, निवाला समझते
थाली है खाली, पेट में ऐंठन
वो सूखे किस्से, वो झूठी दिलासा
दर्पण में दिखती, बेरंग काया
मासूम चेहरे, शफ्फाक सारे
बेदर्द खंजर, लहू के हैं प्यासे
ये सांसों की दलदल
ये जीवन की खुशबू

तुम्ही ने कहा था

नाम लिख दिया है
पत्थरों पे तुम्हारा
ये दिल पत्थर का है
तुम्ही ने कहा था

Friday, January 12, 2024

आलम

ये कौन सा आलम है
तेरी रुसवाई का
हर तरफ जुदाई का
हर तरफ दुहाई का

दिल के मन की चिलमन की

दिल के मन की चिलमन की क्या
सुन लेते हो खामोशी को भी तुम
यूं ही सब कहते नही हैं
जहां के हो खुदाया तुम