Tuesday, February 6, 2024

सचिन

 तेरे सारे दोस्त, जहीन लोगों में शुमार हैं
और एक तू है सचिन, जाहिलों में भी नही

Monday, February 5, 2024

हिज़्र

हम मिलेंगे हिज़्र में आशिक़ मेरे
ये अपनी मुहब्बत का वादा रहा

Sunday, February 4, 2024

 आग नही अब मुझको जलाती है
याद तेरी जब मुझको सताती है

बारिश नही अब मुझको भींगोती
आंसू मेरे बस मुझको रुलाते हैं

छींक

 शब्दों से खेलती, तुम्हारी उंगलियां
मुझे विस्मृत करती हैं
भूल जाता हूं मैं, सब कुछ
बस तुम्हारी छींक याद रहती है
 मेरे दुख की कोई, सीमा नहीं
मुझको मिला है दुख इतना
मैने तो बस, प्यार किया
लूटी नही कोई दुनिया

Friday, February 2, 2024

 रात के अंधेरे में अपराध करू
 के 
दिन के उजाले में मेहनत करू 
मैं 
सोचता हूँ 
दिन रात का फर्क 
मैं क्या करू

नर्क

 तुम चले गये हो मुझे पता है
एक गम है
तुम नहीं आओगे मुझे पता है
एक गम है

जाना था चले जाते
जाते जाते कह जाते
बिन कहे गये हो 
एक गम है

राह निकलती कहाँ है कोई
अब के मैं गम से निकलु
ये भी एक गम है

एक प्यार ही तो माँगा था
प्यार से दुतकार कर देते

जिंदगी नर्क तो रहती
तुम प्यार से याद आते

अब भी प्यार करता हूँ
गर न किया तो
ये नरक कैसे भूगतुंगा
जो तुमने दिया है
पर तुम कब मानते हो ये
तुमने दिया है 
ये भी एक गम है
 धर्म निभाते मानवता का
कितनों की बलि चढ़ गई

जाने कितनी मांओं ने जोहर किया
आबरू कितनों की ही लूट गई

अहिंसा धर्म नही कायरता है
माधव ये सिखलाते हैं

इंसानियत की आड़ में
गीता हाथ से छुट गई

दिल दुखे न फिक्र में इसके
रोज चिताएं सजती हैं

मानवता की आड़ में देखो
कैसे मानवता ही मरती है

Thursday, February 1, 2024

छल समझो

 पाठ अहिंसा छल समझो
गीता के उपदेश को समझो
होती अहिंसा परम धर्म तो
माधव क्यों कहते समझो

अक्षर

 अक्षरों की ओट से, झांकती है जिंदगी
अक्षरों की ओट से, दर्द बयां करती जिंदगी

सांसे

 न तुम मज़ा देती हो न सुकूँ
हमें तो आदत है तुम्हारी "सांसे"
 वायदे कर तुम चले गए 
निभा हम रहे हैं