चंद कविताएं लगी हैं हाथ मेरे
माला विचारों की पिरोई हुई सी
थोड़ी शरमाई, थोड़ी सकुचाई
तो कहीं कहीं थोड़ी घबड़ाई हुई सी
माला विचारों की पिरोई हुई सी
थोड़ी शरमाई, थोड़ी सकुचाई
तो कहीं कहीं थोड़ी घबड़ाई हुई सी
sachinkejriwal1@gmail.com
मैंने तुमको देखा है,मेरे भोले भगवान
मिलने मुझसे आते हो, खवाबों में तुम हरदम
तुम अच्छे हो, तुम सच्चे हो, तुम से है ये जीवन
मुझको बनाया, और बनाया है
तुमने जमीं ये गगनमैं
ने तुमको .......
दिल में हो तुम बसे हुए,
मन में हो तुम सजे हुए
हर जगह हो बस तुम ही,
तुम ही हो बस हर जगह
मेरे भोले भगवन ,
मैंने तुमको ...
कभी-कभी तुम, रूठ जाते हो मुझसे
अभी भी तो रूठे हुए, देखो तुम मुझसे
मान भी जाओ अब जिद छोड़ो, मेरे प्यारे भगवन
मैंने तुमको ....
दुःख में और चिंता में साथ रहो तुम हरदम
इतनी कृपा करो हमपे,
रहे हर तरफ़ खुशियो का मौसम
मैंने तुमको देखा है ....
अपना काम चलाता हूं
हां वो एक कबीला हैबेढंग से लोग रहते हैंजो सिर्फ गुनहगार हैंहो सकता है कुछ अच्छे भी होंजिनके होने पर भी शक हैयाद है कुछ सालों पहलेकितने कबीले वालों नेकितनी तबाही मचाई थीये पागल घोड़े से हैं बसलगाम कस लो इनकीज़रा नरमदिली से पेश आओफिर देखो कैसे येतुम्हारे घर तुम्हारे शहरतबाह करते दिखेंगेसख्त रहो डटे रहोरहस्य कुछ नहीं है इन कबीलों मेंसब के सब बे पर्दा हैंदुनियां जानती हैसब जानते हैंये दुर्दांत दरिंदे हैंहत्यारे हैं लुटेरे हैंबस यही एक बात है इनमेंजिससे सब खौफ में हैं