Saturday, January 13, 2024

ये सांसों की दलदल

 ये सांसों का दलदल
ये जीवन की खुशबू
फिर मौत का तांडव
रातों को जगना
सितारों को तकना
आंखों की चिलमन का हौले से गिरना
गिरते ही जाना कभी न सम्हलना
खुराफाती दुनिया, नासाज सारे
बस बजते ही जाते, बेसुरे सारे
होली के रंगों सा सस्ता जमीर
दिवाली की रौनक में बिकता जमीर
ये पैसों की खन खन
वो रोटी की तड़पन
चांद को ताकते, निवाला समझते
थाली है खाली, पेट में ऐंठन
वो सूखे किस्से, वो झूठी दिलासा
दर्पण में दिखती, बेरंग काया
मासूम चेहरे, शफ्फाक सारे
बेदर्द खंजर, लहू के हैं प्यासे
ये सांसों की दलदल
ये जीवन की खुशबू

तुम्ही ने कहा था

नाम लिख दिया है
पत्थरों पे तुम्हारा
ये दिल पत्थर का है
तुम्ही ने कहा था

Friday, January 12, 2024

आलम

ये कौन सा आलम है
तेरी रुसवाई का
हर तरफ जुदाई का
हर तरफ दुहाई का

दिल के मन की चिलमन की

दिल के मन की चिलमन की क्या
सुन लेते हो खामोशी को भी तुम
यूं ही सब कहते नही हैं
जहां के हो खुदाया तुम

Thursday, January 11, 2024

लाजवाब हैं सब

हुस्न में फुसूं
इश्क में जुनूं
दिल में सुकूं
लाजवाब हैं सब
लाजवाब हैं सब
हिज्र की तड़प
लम्स के लब
लाजवाब हैं सब
लाजवाब हैं सब

Wednesday, January 10, 2024

माहिरी

बेवकूफ बनाए जाने का सिलसिला जहां में जारी है
हर किसी को देखो इस खेल में हासिल माहिरी है।
 

चंद कविताएं

चंद कविताएं लगी हैं हाथ मेरे
माला विचारों की पिरोई हुई सी
थोड़ी शरमाई, थोड़ी सकुचाई
तो कहीं कहीं थोड़ी घबड़ाई हुई सी

Tuesday, January 9, 2024

भगवन

मैंने तुमको देखा है,मेरे भोले भगवान
मिलने मुझसे आते होखवाबों में तुम हरदम

तुम अच्छे हो, तुम सच्चे हो, तुम से है ये जीवन

मुझको बनाया, और बनाया है

तुमने जमीं ये गगनमैं

ने तुमको .......


दिल में हो तुम बसे हुए,

मन में हो तुम सजे हुए

हर जगह हो बस तुम ही,

तुम ही हो बस हर जगह

मेरे भोले भगवन ,

मैंने तुमको ...


कभी-कभी तुमरूठ जाते हो मुझसे

अभी भी तो रूठे हुए, देखो तुम मुझसे

मान भी जाओ अब जिद छोड़ो, मेरे प्यारे भगवन

मैंने तुमको ....

दुःख में और चिंता में साथ रहो तुम हरदम

इतनी कृपा करो हमपे,

रहे हर तरफ़ खुशियो का मौसम

मैंने तुमको देखा है ....



हमदम

जो जिसका हमदम है
वो एक दूजे के संग है
मेरा कोई हमदम नही
कहां कोई मेरे संग है

खामोशी से रिश्ता

सबके हाथों में इक हाथ है
मेरी अलग पहचान है
खामोशी से रिश्ता मेरा
अंधेरा मेहमान है

Monday, January 8, 2024

सफ्फ़ाक

 ज़ख्म इतने लिए कौन फिरता है
क्या दुनिया इतनी सफ्फ़ाक है

लफ्ज़-लफ्ज, नज्म-नज्म को
तरसते लोग 
क्या दुनिया इतनी सफ्फ़ाक है 

आज़ाब

आज कल में उतरेगा वो, शैतान आज़ाब लिए

फरिस्ते की शक्ल में, रहता है जो आसमां में