Thursday, January 11, 2024

लाजवाब हैं सब

हुस्न में फुसूं
इश्क में जुनूं
दिल में सुकूं
लाजवाब हैं सब
लाजवाब हैं सब
हिज्र की तड़प
लम्स के लब
लाजवाब हैं सब
लाजवाब हैं सब

Wednesday, January 10, 2024

माहिरी

बेवकूफ बनाए जाने का सिलसिला जहां में जारी है
हर किसी को देखो इस खेल में हासिल माहिरी है।
 

चंद कविताएं

चंद कविताएं लगी हैं हाथ मेरे
माला विचारों की पिरोई हुई सी
थोड़ी शरमाई, थोड़ी सकुचाई
तो कहीं कहीं थोड़ी घबड़ाई हुई सी

Tuesday, January 9, 2024

भगवन

मैंने तुमको देखा है,मेरे भोले भगवान
मिलने मुझसे आते होखवाबों में तुम हरदम

तुम अच्छे हो, तुम सच्चे हो, तुम से है ये जीवन

मुझको बनाया, और बनाया है

तुमने जमीं ये गगनमैं

ने तुमको .......


दिल में हो तुम बसे हुए,

मन में हो तुम सजे हुए

हर जगह हो बस तुम ही,

तुम ही हो बस हर जगह

मेरे भोले भगवन ,

मैंने तुमको ...


कभी-कभी तुमरूठ जाते हो मुझसे

अभी भी तो रूठे हुए, देखो तुम मुझसे

मान भी जाओ अब जिद छोड़ो, मेरे प्यारे भगवन

मैंने तुमको ....

दुःख में और चिंता में साथ रहो तुम हरदम

इतनी कृपा करो हमपे,

रहे हर तरफ़ खुशियो का मौसम

मैंने तुमको देखा है ....



हमदम

जो जिसका हमदम है
वो एक दूजे के संग है
मेरा कोई हमदम नही
कहां कोई मेरे संग है

खामोशी से रिश्ता

सबके हाथों में इक हाथ है
मेरी अलग पहचान है
खामोशी से रिश्ता मेरा
अंधेरा मेहमान है

Monday, January 8, 2024

सफ्फ़ाक

 ज़ख्म इतने लिए कौन फिरता है
क्या दुनिया इतनी सफ्फ़ाक है

लफ्ज़-लफ्ज, नज्म-नज्म को
तरसते लोग 
क्या दुनिया इतनी सफ्फ़ाक है 

आज़ाब

आज कल में उतरेगा वो, शैतान आज़ाब लिए

फरिस्ते की शक्ल में, रहता है जो आसमां में

दुनिया में



कर कुछ ऐसा रहा हूं, आज कल
या तो, मेरी दुनिया में तुम न होगी
या फिर, इस दुनिया में हम न होंगे

सफ़्फ़ाक लोग

बड़े सफ्फाक हैं लोग जालिम
गला रेत कर दुआएं मांगते हैं
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Nerender Singh, प्रसेनजीत कुमार सनातनी and 2 others

वाशिंदे

डूबते सूरज की जानिब
जा रहा है शहर तुम्हारा
वाशिंदे हो अँधेरे के तुम, अब
अँधेरों में करना पड़ेगा गुजारा

Sunday, May 2, 2021

किसान

 मैं वो किसान हूं जो
विचारों के बीज बोता है
और शब्दों की फसल काटता है
मेहनताने में मिलती है मुझे
चंद कहानियां और कुछ कविताएं
और जब कभी सुखा पड़ता है तो
मैं इन्ही कहानियों और कविताओं से

अपना काम चलाता हूं