Tuesday, January 9, 2024

भगवन

मैंने तुमको देखा है,मेरे भोले भगवान
मिलने मुझसे आते होखवाबों में तुम हरदम

तुम अच्छे हो, तुम सच्चे हो, तुम से है ये जीवन

मुझको बनाया, और बनाया है

तुमने जमीं ये गगनमैं

ने तुमको .......


दिल में हो तुम बसे हुए,

मन में हो तुम सजे हुए

हर जगह हो बस तुम ही,

तुम ही हो बस हर जगह

मेरे भोले भगवन ,

मैंने तुमको ...


कभी-कभी तुमरूठ जाते हो मुझसे

अभी भी तो रूठे हुए, देखो तुम मुझसे

मान भी जाओ अब जिद छोड़ो, मेरे प्यारे भगवन

मैंने तुमको ....

दुःख में और चिंता में साथ रहो तुम हरदम

इतनी कृपा करो हमपे,

रहे हर तरफ़ खुशियो का मौसम

मैंने तुमको देखा है ....



हमदम

जो जिसका हमदम है
वो एक दूजे के संग है
मेरा कोई हमदम नही
कहां कोई मेरे संग है

खामोशी से रिश्ता

सबके हाथों में इक हाथ है
मेरी अलग पहचान है
खामोशी से रिश्ता मेरा
अंधेरा मेहमान है

Monday, January 8, 2024

सफ्फ़ाक

 ज़ख्म इतने लिए कौन फिरता है
क्या दुनिया इतनी सफ्फ़ाक है

लफ्ज़-लफ्ज, नज्म-नज्म को
तरसते लोग 
क्या दुनिया इतनी सफ्फ़ाक है 

आज़ाब

आज कल में उतरेगा वो, शैतान आज़ाब लिए

फरिस्ते की शक्ल में, रहता है जो आसमां में

दुनिया में



कर कुछ ऐसा रहा हूं, आज कल
या तो, मेरी दुनिया में तुम न होगी
या फिर, इस दुनिया में हम न होंगे

सफ़्फ़ाक लोग

बड़े सफ्फाक हैं लोग जालिम
गला रेत कर दुआएं मांगते हैं
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Nerender Singh, प्रसेनजीत कुमार सनातनी and 2 others

वाशिंदे

डूबते सूरज की जानिब
जा रहा है शहर तुम्हारा
वाशिंदे हो अँधेरे के तुम, अब
अँधेरों में करना पड़ेगा गुजारा

Sunday, May 2, 2021

किसान

 मैं वो किसान हूं जो
विचारों के बीज बोता है
और शब्दों की फसल काटता है
मेहनताने में मिलती है मुझे
चंद कहानियां और कुछ कविताएं
और जब कभी सुखा पड़ता है तो
मैं इन्ही कहानियों और कविताओं से

अपना काम चलाता हूं

Friday, April 9, 2021

कबीले वाले लोग

हां वो एक कबीला है
बेढंग से लोग रहते हैं
जो सिर्फ गुनहगार हैं
हो सकता है कुछ अच्छे भी हों
जिनके होने पर भी शक है
याद है कुछ सालों पहले
कितने कबीले वालों ने
कितनी तबाही मचाई थी
ये पागल घोड़े से हैं बस
लगाम कस लो इनकी
ज़रा नरमदिली से पेश आओ
फिर देखो कैसे ये
तुम्हारे घर तुम्हारे शहर
तबाह करते दिखेंगे
सख्त रहो डटे रहो
रहस्य कुछ नहीं है इन कबीलों में
सब के सब बे पर्दा हैं
दुनियां जानती है
सब जानते हैं
ये दुर्दांत दरिंदे हैं
हत्यारे हैं लुटेरे हैं
बस यही एक बात है इनमें
जिससे सब खौफ में हैं

Wednesday, April 7, 2021

दुनिया

काश के बदल जाती मेरे शब्दों से दुनिया
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनिया
खा लेता चांद समझ रोटी मैं तुझे
गर मां थाली में पड़ोस देती न दुनिया
तमाशे बड़े देखता हूं जहां में
नजारें भी गजब दिखती है दुनिया
हरारतें अपनी मिटा लेने के बाद
नामुराद समझ लेती है दुनिया
नाराज गर हो जाए सब अपने
तो दिलशाद हो जाती है दुनियां
काश के बदल जाती मेरे शब्दों से दुनियां
बड़ी खूबसूरती से सहेज लेता मैं दुनियां

Tuesday, May 22, 2012

इंतज़ार में नुक्स है 
इंतज़ार में नुक्स है,
इल्म इसका किसको है,
लुफ्त ए इंतज़ार का मज़ा बन  गई 
अजीब सी सजा धड़कने चाहत की 
इंतज़ार ए धड़कन हो गई 
और एक  तुम  हो की ..........हा.

बदल  गए हो तुम  जब  से, जुदा हुए हो तुम,
न  जाने क्यू ये नाराज़गी  है, किस  बात  का गुमां  है 
खबर नहीं तुम्हे के कोई प्यार में तेरे कितना दर दर घुमा है,
खामोश  हो तुम पर इधर अजीब सी हलचल  है 
क्यू  कोई इबादत  करे 
कोई क्यू  तुमको पूजे 
नीम  सजदे में क्यू  कोई झुके 
कैसे चले कोई इन  राहो पे,
जिस पे हर  पग  पत्थर  दिल  सनम  मिले 
उफ़  कितनी विसम्ताओ  से भरा है ये जीवन 
उस  पर दुविदा जीने की 
क्या जुल्म है ये 
क्या सितम है ये